कांग्रेस के छात्र और युवा संगठनों के भीतर वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को मिल रही तवज्जो को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवा नेताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अगर वे कांग्रेस में क्रेडिट लेने के लिए आए हैं, तो वे गलत पार्टी में हैं। उन्होंने जोर दिया कि कांग्रेस ने देश में दशकों तक किए गए अपने काम का श्रेय लेने की कोशिश नहीं की, इसलिए संगठन के भीतर भी नेताओं को अपने काम के बदले क्रेडिट मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने यह बात गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान कही। इस बैठक में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और सेवा दल के नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी मौजूद थे।
'पुलिस की ज्यादती और तकलीफें हमें मजबूत बनाएंगी'बैठक में मौजूद एक नेता के मुताबिक, राहुल गांधी ने हाल के उन प्रदर्शनों का भी जिक्र किया, जिनमें कार्यकर्ताओं को पुलिस की कार्रवाई और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इन प्रदर्शनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे अनुभव पार्टी के कार्यकर्ताओं को कमजोर करने के बजाय और मजबूत बनाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हुई शारीरिक तकलीफों और पुलिस की कथित ज्यादतियों के संदर्भ में यह संदेश दिया कि संघर्ष से मिलने वाले अनुभव आगे काम आएंगे। इसी दौरान राहुल गांधी ने कहा कि टूटा हुआ पैर केवल मेडिकल इमरजेंसी नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे अपने दिल में सम्मान के प्रतीक के रूप में भी रखना चाहिए। उनके इस संदेश का जोर संघर्ष के दौरान झेली गई तकलीफों को सम्मान और मजबूती से जोड़ने पर था।
राहुल गांधी ने युवा संगठनों में काम करने का महत्व समझायाबैठक के दौरान राहुल गांधी ने युवा नेताओं को यह भी समझाया कि युवा कांग्रेस और एनएसयूआई जैसे संगठन केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी देते हैं। उनके मुताबिक, इन संगठनों में काम करने से अनुशासन, त्याग, मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की ताकत और सही बात के लिए खड़े होने का साहस सीखने को मिलता है। राहुल गांधी ने युवा नेताओं से कहा कि उन्हें संगठन में मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्हें यहां से सीखने, आगे बढ़ने और अपने अनुभवों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में जब उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएं, तो वे उन्हें निभाने के लिए तैयार रहें। क्रेडिट को लेकर उनकी टिप्पणी को भी संगठन में काम करने की इसी सीख से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में आने का उद्देश्य केवल श्रेय हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने पार्टी के दशकों के काम का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कांग्रेस ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में किए गए कार्यों का क्रेडिट लेने की कोशिश नहीं की, तो संगठन के भीतर भी नेताओं को इसी भावना के साथ काम करना चाहिए।
नेहा बोरा को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं में क्यों है नाराजगी?नेहा बोरा को 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विपक्षी मार्च में प्रमुखता दिए जाने के बाद कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के कुछ नेताओं में नाराजगी की बात कही जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने सोमवार को हुए इस मार्च के दौरान नेहा बोरा को गांधी परिवार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ एक ही बस में जगह दी थी। संगठन के कुछ नेताओं को यह फैसला पसंद नहीं आया। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने उस चलन पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े रहे नेता अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। नेहा बोरा को मार्च में मिली प्रमुखता को लेकर सामने आई नाराजगी इसी व्यापक बहस से जुड़ी बताई जा रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि ऐसे समय में वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के साथ तालमेल बढ़ाने की रणनीति पर विचार करने की जरूरत है। उनका तर्क है कि पिछले दो दशकों में इस विचारधारा का चुनावी प्रभाव तेजी से घटा है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि इस तरह का राजनीतिक तालमेल पार्टी की मौजूदा रणनीति के साथ किस हद तक मेल खाता है। इन नेताओं की दलील है कि कांग्रेस इस दौरान उन रूढ़िवादी हिंदू मतदाताओं को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है, जो अभी किसी एक राजनीतिक दल के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। ऐसे में वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े नेताओं को प्रमुखता दिए जाने को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं के बीच असहमति सामने आने की बात कही जा रही है।
प्रियंका गांधी ने भी युवा नेताओं को दी नसीहतबैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी युवा नेताओं को उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी का अहसास कराया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का काम, आचरण और व्यवहार उस संगठन के मूल्यों को दर्शाता है, जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए युवा नेताओं को अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों को लेकर सजग रहना चाहिए। प्रियंका गांधी ने युवा नेताओं को कांग्रेस की ताकत और भविष्य बताते हुए कहा कि पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व भी उनसे ताकत हासिल करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा नेता केवल अपना प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि उनके काम और व्यवहार के जरिए पूरी पार्टी की छवि सामने आती है। उनकी नसीहत का मुख्य संदेश यह था कि युवा नेताओं को अपनी व्यक्तिगत भूमिका से आगे बढ़कर संगठन की प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी को समझना चाहिए। पार्टी के लिए काम करते समय उनके आचरण में कांग्रेस के मूल्यों की झलक दिखनी चाहिए, क्योंकि उनकी गतिविधियां केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहतीं।
खरगे बोले- देश की राजनीतिक दिशा तय करने में युवाओं की अहम भूमिकाबैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी युवाओं की राजनीतिक भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं ने हमेशा देश की राजनीतिक दिशा तय करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि कांग्रेस के युवा और अग्रिम संगठन उन सरकारों को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो युवाओं के हितों के खिलाफ काम करती हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने को भी इन संगठनों की जिम्मेदारी बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि युवा संगठनों का साहस और दृढ़ विश्वास भारतीय लोकतंत्र की रक्षा करने के पार्टी के संकल्प को मजबूत करता है। इस तरह बैठक में राहुल गांधी ने संगठन के भीतर क्रेडिट की अपेक्षा के बजाय काम, अनुशासन और संघर्ष से सीखने पर जोर दिया, जबकि प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने युवा नेताओं को पार्टी की जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक भूमिका का संदेश दिया।