RAC टिकटधारकों को मिल सकता है रिफंड? रेल यात्रियों की सुविधा को लेकर प्रस्ताव पेश

रेल यात्रियों की सुविधा को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। संसदीय लोक लेखा समिति (PAC) ने रेलवे की मौजूदा RAC टिकट व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे यात्रियों के साथ अन्यायपूर्ण करार दिया है। समिति का मानना है कि जब किसी यात्री को पूरी बर्थ नहीं मिलती और उसे यात्रा के दौरान सीट साझा करनी पड़ती है, तब उससे पूरा किराया वसूलना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

संसद में पेश अपनी रिपोर्ट “इंडियन रेलवे में ट्रेन संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय” में समिति ने साफ कहा है कि चार्ट तैयार होने के बाद भी यदि यात्री RAC श्रेणी में ही बना रहता है और उसे पूर्ण बर्थ की सुविधा नहीं मिलती, तो उससे पूरा भाड़ा लेना न्यायसंगत नहीं है। समिति ने इसे यात्रियों के हितों के खिलाफ बताते हुए रेलवे की नीति में बदलाव की जरूरत जताई है।

RAC यात्रियों को रिफंड देने का सुझाव

PAC ने रेलवे मंत्रालय को सलाह दी है कि ऐसे यात्रियों के लिए आंशिक किराया वापसी (Partial Refund) की व्यवस्था विकसित की जाए। समिति ने यह भी कहा है कि इस दिशा में उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी उसे दी जानी चाहिए। फिलहाल व्यवस्था यह है कि RAC टिकट बुक करते समय यात्रियों से पूरा किराया लिया जाता है, लेकिन यात्रा के दौरान कई बार उन्हें पूरी बर्थ नहीं मिलती और दो यात्रियों को एक ही बर्थ साझा करनी पड़ती है। बावजूद इसके, दोनों यात्रियों से पूरा किराया वसूला जाता है, जिसे समिति ने अनुचित बताया है।

सुपरफास्ट ट्रेनों के मानकों पर उठे सवाल

रिपोर्ट में केवल RAC टिकट व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सुपरफास्ट ट्रेनों के मानदंडों की भी गहन समीक्षा की बात कही गई है। समिति ने याद दिलाया कि मई 2007 में यह तय किया गया था कि यदि किसी ट्रेन की औसत गति ब्रॉड गेज पर न्यूनतम 55 किमी प्रति घंटा और मीटर गेज पर 45 किमी प्रति घंटा हो, तभी उसे सुपरफास्ट की श्रेणी में रखा जाएगा।

हालांकि, समिति की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश में चल रही 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 ट्रेनों की औसत गति 55 किमी प्रति घंटा से भी कम पाई गई। वहीं, केवल 47 ट्रेनें ही ऐसी हैं जिनकी गति तय मानक से अधिक है। समिति ने चीन और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय रेलवे को भी समय की मांग के अनुसार ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

2030 तक 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का लक्ष्य

PAC ने सिफारिश की है कि वर्ष 2030 तक सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति 100 किमी प्रति घंटा तक पहुंचाने की संभावनाओं पर अध्ययन किया जाए। रिपोर्ट में यह भी टिप्पणी की गई है कि कई बार ट्रेनों को सुपरफास्ट घोषित करने का उद्देश्य यात्रियों से अधिक किराया वसूलना प्रतीत होता है। समिति ने सुझाव दिया कि यदि किसी ट्रेन की गति तय सीमा से नीचे चली जाती है, तो उसे सुपरफास्ट श्रेणी से हटाकर उसके किराए में भी उचित संशोधन किया जाना चाहिए।

नई ट्रेनों से पहले समयपालन पर जोर

समिति ने रेलवे को यह भी सलाह दी है कि नई ट्रेनों की शुरुआत के बजाय मौजूदा ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्सर नई ट्रेनों को रास्ता देने के लिए पुरानी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को रोक दिया जाता है, जिससे उनकी समयबद्धता प्रभावित होती है। PAC का मानना है कि यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए ट्रेनों का समय पर चलना ज्यादा जरूरी है, न कि केवल नई ट्रेनों की संख्या बढ़ाना।