जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ उनके पूर्ववर्ती राजीव कुमार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए हैं। किशोर का आरोप है कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर पिछले कई वर्षों से सवाल उठते रहे हैं और संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने राजीव कुमार के रिटायरमेंट के बाद निजी क्षेत्र में उन्हें मिली जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत बताई। किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में विधान परिषद की सीटों के लिए चुनाव की तैयारियां चल रही हैं और विपक्षी INDIA गठबंधन दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है।
राजीव कुमार के कार्यकाल का भी किया जिक्रप्रशांत किशोर ने गुरुवार को कहा कि ज्ञानेश कुमार से पहले राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे और उनके कार्यकाल में भी चुनाव आयोग इसी तरह काम करता था। उन्होंने दावा किया कि राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद उन्हें देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC का चेयरमैन बना दिया गया। किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की छवि और विश्वसनीयता दांव पर है। उनके मुताबिक, यह स्थिति किसी एक व्यक्ति या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले सात से आठ वर्षों से लगातार ऐसा हो रहा है। उन्होंने अपने बयान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से बनी चिंताओं का उल्लेख किया।
मतदाता सूची से लेकर मतगणना तक पर सवालप्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर केवल विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण को लेकर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव कार्यक्रम घोषित करने और आदर्श आचार संहिता लागू कराने के तरीके का उल्लेख किया। किशोर ने बिहार में मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदने के कथित मामले और मतगणना में धांधली के आरोपों का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर चुनाव आयोग सरकार और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति के कारण लोगों के मन में यह धारणा बन रही है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहे हैं। हालांकि, ये चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशांत किशोर की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ सुधारों की मांगकिशोर ने कहा कि मौजूदा स्थिति में केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर्याप्त नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की व्यवस्था में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार करने और मतदाता सूची तैयार करने के तरीके को बेहतर बनाने की मांग की। उन्होंने मतगणना से पहले फॉर्म 17 को सार्वजनिक करने की भी बात कही। इसके साथ ही किशोर ने काउंटिंग की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया, ताकि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता का भरोसा बढ़ सके। उनकी मांगों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था में बदलाव और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता शामिल है।
बिहार की आठ विधान परिषद सीटों पर चुनाव
इस बीच बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव होना है। जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है। प्रशांत किशोर पहले ही दावा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी पटना स्नातक और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। बांकीपुर के विधायक ने बुधवार को विधान परिषद चुनाव के मतदाताओं का जिक्र करते हुए कहा था कि इन चुनावों में राज्य के सबसे शिक्षित मतदाता वोट डालते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि मतदाता 10,000 रुपये के लिए अपने वोट नहीं बेचेंगे। प्रशांत किशोर ने भी बिहार में बदलाव की शुरुआत बांकीपुर से होने की बात कही और कहा कि इसे आगे बढ़ाना मतदाताओं की जिम्मेदारी है।
INDIA गठबंधन की क्या हैं मांगें?विपक्षी INDIA गठबंधन पिछले तीन दिनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहा है। उसकी प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR पर रोक लगाना शामिल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग उठाई है। इसके अलावा, संदर्भ सामग्री के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर से प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है।