प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख, बोले- ‘सत्यपाल मलिक के निधन से दुखी हूं, परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं’

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी शोक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, सत्यपाल मलिक जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवारजनों और समर्थकों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शांति!

किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे मलिक

79 वर्षीय सत्यपाल मलिक ने मंगलवार दोपहर 1 बजे दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें 11 मई को भर्ती कराया गया था, जब उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बताया गया कि वे लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और लगातार इलाजरत थे।

कृषि कानूनों के खिलाफ मुखर समर्थन

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक कद उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का खुलकर समर्थन किया। वे उन चंद नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के पक्ष में मुखर होकर बयान दिए। इसी वजह से उनके और मोदी सरकार के संबंधों में तल्ख़ी आ गई थी।

महिला पहलवानों के आंदोलन में भी पहुंचे थे धरनास्थल

साल 2023 में भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ। उस समय भी सत्यपाल मलिक ने सार्वजनिक रूप से पहलवानों का साथ दिया और धरनास्थल पर पहुंचकर कहा कि वह “व्यक्तिगत रूप से न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”

CBI केस और 2200 करोड़ का भ्रष्टाचार आरोप

मई 2024 में सत्यपाल मलिक एक बार फिर सुर्खियों में आए जब CBI ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। यह मामला जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में स्थित किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट से संबंधित था, जिसमें ठेके आवंटन में कथित अनियमितताओं और 2200 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगे। यह घटनाक्रम उनके सार्वजनिक जीवन के अंतिम अध्याय को विवादों से भर गया।

राजनीति में बहुचर्चित यात्रा

अपने लंबे राजनीतिक सफर में सत्यपाल मलिक ने कांग्रेस, लोकदल, जनता दल, समाजवादी पार्टी और अंततः भाजपा जैसी विभिन्न पार्टियों के साथ काम किया। लेकिन उनकी छवि हमेशा एक जाट नेता और किसानों के प्रबल पक्षधर के रूप में बनी रही।

चौधरी चरण सिंह से वैचारिक प्रेरणा

वे हमेशा डॉ. लोहिया और चौधरी चरण सिंह की समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे। सत्यपाल मलिक अक्सर कहते थे कि वे चौधरी चरण सिंह को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। उनकी राजनीति का केंद्रबिंदु किसान हित, ग्रामीण विकास और सत्ता से निर्भीकता रहा।