शनिवार को देशभर में क्यों ठप रहेंगी Ola, Uber और Rapido सेवाएं? ड्राइवर्स ने किया ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का ऐलान

शनिवार, 7 फरवरी को देशभर में ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाएं प्रभावित रहने वाली हैं। Ola, Uber और Rapido से जुड़े ड्राइवर्स ने एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस बंद के चलते यात्रियों को कार, ऑटो और बाइक टैक्सी बुक करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

ड्राइवर्स संगठनों ने इस विरोध को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने देश के विभिन्न मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस हड़ताल की घोषणा की है। यूनियन का कहना है कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही अनदेखी और समस्याओं के खिलाफ मजबूरी में उठाया गया है।

Ola-Uber-Rapido ड्राइवर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए हड़ताल की जानकारी साझा की। पोस्ट में यूनियन ने लिखा, “7 फरवरी 2026 को पूरे भारत में ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ करेंगे। न न्यूनतम किराया तय है, न कोई रेगुलेशन—सिर्फ लगातार शोषण।”

यूनियन का कहना है कि ऐप कंपनियां ड्राइवर्स की मेहनत के बदले उचित भुगतान नहीं कर रहीं और मनमाने नियम लागू कर रही हैं, जिससे गिग वर्कर्स की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

हड़ताल की वजह क्या है?

यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर ड्राइवर्स की समस्याओं को विस्तार से सामने रखा है। पत्र में कहा गया है कि ये मुद्दे काफी समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक इनका कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

यूनियन के मुताबिक Ola, Uber, Rapido, Porter और अन्य एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे ऑटो, कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवर्स के लिए सरकार द्वारा कोई तय किराया प्रणाली मौजूद नहीं है। इसका फायदा उठाकर कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय करती हैं, जिससे ड्राइवर्स की कमाई अस्थिर बनी रहती है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि किराया निर्धारण का पूरा नियंत्रण कंपनियों के हाथ में होने के कारण लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स आय की अनिश्चितता, खराब कामकाजी हालात और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। इससे शोषण को बढ़ावा मिल रहा है और ड्राइवर्स की आजीविका खतरे में पड़ रही है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

यूनियन ने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि जहां एक ओर एग्रीगेटर कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों ऐप-बेस्ड ड्राइवर्स को धीरे-धीरे गरीबी की ओर धकेला जा रहा है।

ड्राइवर्स संगठनों का कहना है कि यदि न्यूनतम किराया, स्पष्ट नियम और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जा सकता है। फिलहाल 7 फरवरी को होने वाला यह ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ सरकार और कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।