कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखे बयान जारी किए हैं, जिसने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। शकील अहमद ने राहुल गांधी को पार्टी का “वर्चुअल प्रेसिडेंट” और असुरक्षित नेता करार दिया। इस बयान का लाभ उठाते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए और कांग्रेस को आंतरिक रूप से कमजोर तथा जनता को गुमराह करने वाली पार्टी बताया।
खड़गे को डमी प्रेसिडेंट बताया गयाशकील अहमद के बयान उस वीडियो क्लिप के बाद चर्चा में आए जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को “वर्चुअल प्रेसिडेंट” करार दिया। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी यह वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी पर पाखंड करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शकील अहमद ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस का डमी प्रेसिडेंट बनाया है। वास्तव में, कांग्रेस में संगठनात्मक लोकतंत्र पर उनका भरोसा नहीं है।
असुरक्षा और नेतृत्व की कमजोरियां उजागरशहजाद पूनावाला ने कहा कि शकील अहमद के बयान कांग्रेस के अंदरूनी कामकाज की वास्तविकता को उजागर कर देते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी उन नेताओं के साथ असुरक्षित महसूस करते हैं जो पार्टी में सच्चाई बोलते हैं। ऐसे नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर दिया जाता है। इसी असुरक्षा और असहजता के कारण पार्टी की आंतरिक कमजोरियां सामने आई हैं। पूनावाला ने बिहार चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि हार वोट चोरी या तकनीकी कारणों से नहीं हुई, बल्कि आंतरिक विफलताओं और गलत टिकट वितरण के कारण पार्टी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ा।
विफलता छिपाने के लिए वोट चोरी का आरोपपूनावाला ने आगे कहा कि राहुल गांधी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लगातार वोट चोरी का आरोप लगाते हैं। उनके सार्वजनिक बयान पार्टी के अंदर की सच्चाई को नहीं दर्शाते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने उन नेताओं को किनारे किया है, जो पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी थे। इसी वजह से पार्टी कई राज्यों में कमजोर और हाशिए पर चली गई है।
BJP का रिएक्शन: कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी उजागरभाजपा IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, कांग्रेस के अंदर की सच्चाई अब साफ हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी को असुरक्षित नेता और कायर बताया है। राहुल गांधी को पार्टी में मजबूत नेताओं से खतरा महसूस होता है, इसलिए उन्होंने लगातार अपनी जमीनी लीडरशिप को कमजोर किया। यही कारण है कि कांग्रेस की आंतरिक कमजोरियां उजागर हुई हैं और पार्टी कई राज्यों में प्रभाव खो रही है।