अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की तैयारी के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है। भारत ने कहा है कि तेल खरीद से जुड़े फैसले देश की ऊर्जा जरूरतों, बाजार की स्थिति और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
मामला अमेरिका के Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 से जुड़ा है। अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को 7 अगस्त को 86-11 वोट से पारित किया था। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।
अमेरिका में बिल पर आगे बढ़ी प्रक्रियाअमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस बिल पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। मंगलवार को हाउस ने बिल को आगे विचार के लिए 214-211 के वोट से मंजूरी दी। अब बुधवार को इसके अंतिम वोट की प्रक्रिया होने की संभावना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिल किस रूप में आगे बढ़ता है।
सीनेट से पारित संस्करण में किसी देश का नाम सीधे नहीं लिखा गया है। इसमें रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों को टैरिफ के संभावित दायरे में रखने की व्यवस्था है।
हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में सांसद स्टेनी होयर और कैटूर ने एक संशोधन पेश किया था, जिसमें भारत समेत 10 देशों के नाम सीधे शामिल करने का प्रस्ताव था। सूची में चीन, भारत, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल थे। लेकिन हाउस रूल्स कमेटी ने इस संशोधन को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
भारत ने क्या कहाभारत का आधिकारिक रुख यह रहा है कि उसकी तेल खरीद किसी एक देश के दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि बाजार में उपलब्ध विकल्पों और देश की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए तय होती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल पहले भी कह चुके हैं कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना सरकार की प्राथमिकता है।
3 सितंबर को यूक्रेन दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी पूछा गया था कि अगर अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता है तो क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। जयशंकर ने कहा था कि 140 करोड़ लोगों के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है और यूक्रेन का अपना नजरिया है, जिसका भारत सम्मान करता है, लेकिन भारत अपने नजरिए के सम्मान की भी अपेक्षा करता है।
15 सितंबर को विदेश मंत्रालय ने भारत-रूस ऊर्जा सहयोग को दोनों देशों की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने और इसका दायरा बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
अभी भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हु
फिलहाल यह समझना जरूरी है कि अमेरिका ने भारत पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं किया है। मौजूदा मामला अमेरिकी संसद में चल रही विधायी प्रक्रिया से जुड़ा है। बिल को हाउस से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होगी। इसके अलावा, अंतिम कानून में टैरिफ संबंधी प्रावधान किस रूप में रहता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
इसलिए मौजूदा स्थिति में यह कहना अधिक सही है कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ की संभावना वाले अमेरिकी विधेयक पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि भारत ने अपनी ऊर्जा खरीद नीति में बदलाव की घोषणा नहीं की है। भारत-रूस ऊर्जा सहयोग को लेकर विदेश मंत्रालय ने 15 सितंबर को इसे महत्वपूर्ण साझेदारी का हिस्सा बताया है।