अप्रैल 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था ने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया है, जब वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन पहली बार 2.43 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। यह आंकड़ा न केवल पिछले महीने मार्च के करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, बल्कि पिछले वर्ष अप्रैल 2025 के मुकाबले 8.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि भी दर्शाता है। उस समय अप्रैल 2025 में जीएसटी संग्रह 2.23 लाख करोड़ रुपये के आसपास था, जिसे अब पीछे छोड़ दिया गया है।
टैक्स कलेक्शन ने बनाया नया इतिहासताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में देश का GST कलेक्शन लगातार मजबूती दिखा रहा है। घरेलू स्तर पर बिक्री और सेवाओं से होने वाली कर वसूली में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई।
वहीं दूसरी ओर आयात से प्राप्त जीएसटी में तेज उछाल देखने को मिला, जो 25.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 57,580 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार गतिविधियों में भी तेजी बनी हुई है।
इसी अवधि में रिफंड की राशि भी बढ़कर 19.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 31,793 करोड़ रुपये रही। रिफंड को समायोजित करने के बाद नेट जीएसटी कलेक्शन लगभग 7.3 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में भी मजबूत प्रदर्शनपूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जीएसटी राजस्व में स्थिर और सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं नेट कलेक्शन भी 7.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 19.34 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। इस दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों का योगदान कुल कलेक्शन में सबसे अधिक बना रहा।
विशेषज्ञों की राय: मजबूत खपत और बदलते रुझान का संकेतटैक्स और कंसल्टिंग फर्म AKM Global के इनडायरेक्ट टैक्स प्रमुख इकेश नागपाल का कहना है कि अप्रैल महीने में GST कलेक्शन का बढ़ना एक सामान्य पैटर्न है। वित्त वर्ष के अंत में मार्च में बिक्री और स्टॉक क्लियरेंस बढ़ने के कारण अप्रैल में टैक्स संग्रह स्वाभाविक रूप से अधिक रहता है। इसलिए इस बढ़ोतरी को असामान्य नहीं माना जा सकता।
वहीं EY India के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने बताया कि GST कलेक्शन में यह मजबूत वृद्धि भारतीय उपभोक्ता मांग की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि घरेलू GST वृद्धि की तुलना में आयात से होने वाली तेज बढ़ोतरी एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने सुझाव दिया कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत ढांचे की समीक्षा जरूरी है, ताकि देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिल सके।
सौरभ अग्रवाल ने यह भी कहा कि सरकार का रिफंड को तेजी से प्रोसेस करना लिक्विडिटी सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम है। साथ ही अरुणाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि यह दर्शाती है कि टैक्स आधार व्यापक हो रहा है।
हालांकि उन्होंने आने वाली तिमाही को लेकर सावधानी बरतने की भी सलाह दी है और उम्मीद जताई है कि आगे भी स्थिरता और संतुलित वृद्धि बनी रह सकती है।