देश में तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने एक्सप्रेसवे पर टोल व्यवस्था को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। अब जिन नेशनल एक्सप्रेसवे का निर्माण अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है, वहां यात्रियों से पूरे मार्ग का नहीं बल्कि केवल चालू हिस्से का ही टोल लिया जाएगा। इतना ही नहीं, इस हिस्से के लिए भी टोल दरें कम रखी जाएंगी। सरकार का यह नया प्रावधान 15 फरवरी 2026 से लागू होने जा रहा है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
टोल वसूली से जुड़े नियमों में अहम बदलावसरकार ने नेशनल हाईवे फीस (निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे पूरी लंबाई में चालू नहीं है और उसका केवल कुछ भाग ही उपयोग के लिए खुला है, तो टोल शुल्क भी उसी चालू हिस्से के आधार पर लिया जाएगा।
इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब आंशिक रूप से खुले एक्सप्रेसवे पर टोल दरें एक्सप्रेसवे की बजाय सामान्य नेशनल हाईवे के अनुसार तय की जाएंगी, जो आमतौर पर कम होती हैं। पहले कई जगहों पर ऐसा देखा गया था कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार न होने के बावजूद यात्रियों से पूरी दूरी का टोल वसूला जा रहा था। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। नए नियम इस असमानता को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
यात्रियों और परिवहन उद्योग को होगा लाभसरकार का मानना है कि टोल शुल्क में कमी आने से अधिक वाहन चालक एक्सप्रेसवे के उपलब्ध हिस्सों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे पुराने और व्यस्त नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की संभावना है।
खासकर मालवाहक वाहनों और ट्रकों के लिए यह फैसला बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। तेज आवाजाही से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और सामान की डिलीवरी पहले की तुलना में ज्यादा समयबद्ध तरीके से हो सकेगी। वहीं यात्रियों को भी लंबी दूरी तय करने में कम समय लगेगा और ईंधन की खपत में कमी आएगी, जिससे कुल यात्रा खर्च घटेगा।
ट्रैफिक जाम और प्रदूषण पर भी पड़ेगा असरइस नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य सड़कों पर भीड़ कम करना भी है। जब वाहन चालक कम टोल के कारण एक्सप्रेसवे का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो पुराने मार्गों पर वाहनों की संख्या घटेगी। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या में सुधार होने की उम्मीद है।
कम जाम का मतलब है कि वाहन बिना बार-बार रुकने के लगातार चल सकेंगे। इससे ईंधन की बचत होगी और वाहन प्रदूषण में भी कमी आएगी। सरकार इस बदलाव को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल मान रही है।
15 फरवरी 2026 से लागू होगी नई व्यवस्थासरकार द्वारा किए गए इस संशोधन को 15 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। जिन-जिन एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अभी अधूरा है या जिनका केवल कुछ हिस्सा ही चालू है, वहां यह नया नियम प्रभावी होगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पर यात्रा को ज्यादा किफायती, तेज और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। आने वाले समय में इस कदम से सड़क परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।