'रावण का अंत हुआ था, इनका भी होगा', राम मंदिर दान मामले पर इंडोनेशिया से बरसे धीरेंद्र शास्त्री, बोले- श्रद्धा की चोरी का मिलेगा महादंड

अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस घटनाक्रम को लेकर देशभर में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं विदेशों में भी इसकी चर्चा हो रही है। इसी बीच, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित घोटाले में शामिल लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल धन की चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने एसआईटी की जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज कर इस मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

'रूप बदल गए हैं, लेकिन रावण आज भी मौजूद हैं'

जकार्ता में कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस विषय पर बोलते हुए भावुक दिखाई दिए। उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रेतायुग में रावण ने माता सीता का हरण किया था, जबकि आज के समय में कुछ लोगों ने भगवान राम के नाम पर चढ़ाई गई श्रद्धा को ही निशाना बनाया है। उन्होंने कहा, रावण आज भी हैं, बस उनका स्वरूप बदल गया है। उस समय रावण ने केवल माता जानकी का हरण किया था और उसका पूरा वंश समाप्त हो गया। लेकिन जिन्होंने राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को चुराने की कोशिश की है, उन्हें भी अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच के दौरान यदि और लोग दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति भगवान राम को अर्पित दान में हाथ डालेगा, उसे केवल कानून का दंड ही नहीं, बल्कि भगवान का महादंड भी मिलेगा। गौरतलब है कि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन वहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं का भी गहरा प्रभाव है तथा कई प्रसिद्ध हिंदू मंदिर भी मौजूद हैं।
क्या है राम मंदिर दान गड़बड़ी का पूरा मामला?

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों और दान रसीदों में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसके आधार पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

25 जून को राम जन्मभूमि कोतवाली में ट्रस्ट के नवनियुक्त सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। आरोपों में चोरी, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और अमानत में खयानत जैसी गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं।

एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें अनुकल्प मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की गहराई से जांच जारी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी रसीदों और अनधिकृत तरीकों का इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को गुमराह किया तथा दान की रकम ट्रस्ट तक पहुंचाने के बजाय अपने कब्जे में ले ली। पुलिस ने जांच के दौरान कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज, रसीद बुक और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री भी बरामद की है।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

राम मंदिर दान गड़बड़ी का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि एसआईटी जांच की आड़ में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई करेगी, जबकि असली जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश हो सकती है।

वहीं समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग उठाई है। दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि विपक्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई करने की नीति पर काम कर रही है।