पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को विदेश में छिपे एक आरोपी को भारत वापस लाने में बड़ी कामयाबी मिली है। पंजाब पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से प्रत्यर्पित कर भारत ला दिया है। पुलिस के अनुसार, वह फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए अक्टूबर 2024 में भारत से फरार हुआ था। करीब छह महीने तक चले अंतरराष्ट्रीय अभियान, कानूनी प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के बाद अब उसे भारत वापस लाया गया है।
पंजाब पुलिस के मुताबिक, यूरोप के किसी देश से पंजाब पुलिस की ओर से किया गया यह पहला प्रत्यर्पण है। इस पूरी कार्रवाई को AGTF और OFTEC Punjab ने केंद्रीय एजेंसियों तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से अंजाम दिया। इस अभियान को ‘Operation Eastern Reach’ नाम दिया गया था।
21 आपराधिक मामलों में दर्ज है नामपुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चार मामले फिलहाल ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, वह गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और UAPA/Explosives समेत अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े पांच मामले, Arms Act के नौ मामले, NDPS का एक मामला और UAPA/Explosives का एक मामला दर्ज बताया गया है।
फर्जी पहचान के सहारे भारत से भागा थापंजाब पुलिस के अनुसार, अमृतपाल सिंह अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था, जिसमें उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी।
भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंचा। इसके बाद वह कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उसके फर्जी पासपोर्ट तथा संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी साझा की, जिसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया।
यूक्रेन जाने की कोशिश में मोल्दोवा में पकड़ा गयाअमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय गिरफ्तार किया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
प्रत्यर्पण की कार्रवाई के दौरान 26 मई 2026 को मोल्दोवा की अदालत ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी। अमृत दलम ने इस फैसले के खिलाफ अपील भी की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उसके भारत प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया।
छह महीने तक चला अंतरराष्ट्रीय अभियानअमृतपाल सिंह तक पहुंचने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस दौरान उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों पर लगातार निगरानी रखी गई। अभियान में देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया।
पुलिस ने उसके फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और संभावित लोकेशन से संबंधित इनपुट केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा किए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश को आगे बढ़ाया गया।
मोल्दोवा पहुंची चार सदस्यीय पुलिस टीमप्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और अदालत से रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया।
इसके बाद उसे भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम आरोपी के साथ 12 जून 2026 की सुबह नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पहुंची।
17 मामलों में जांच जारीपुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अमृतपाल सिंह के खिलाफ जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा सात FIR बटाला से संबंधित हैं। इसके अलावा चार FIR गुरदासपुर, दो अमृतसर कमिश्नरेट, दो होशियारपुर, एक लुधियाना कमिश्नरेट और एक FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है।
वहीं, उसके खिलाफ ट्रायल में चल रहे चारों मामले बटाला में दर्ज हैं। इस तरह पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ पंजाब के अलग-अलग जिलों और पुलिस कमिश्नरेट से जुड़े कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
करीब दो साल बाद भारत वापस आयापुलिस के अनुसार, अमृतपाल सिंह करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट का इस्तेमाल कर भारत से बाहर चला गया था। मोल्दोवा में पकड़े जाने के बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और अदालत की कानूनी प्रक्रिया दोनों शामिल रहे।
26 मई को प्रत्यर्पण की मंजूरी और 16 जुलाई को अपील खारिज होने के बाद उसका भारत लौटना तय हुआ। इसके बाद पंजाब पुलिस की टीम ने 11 सितंबर को मोल्दोवा में उसे हिरासत में लिया और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत वापस ले आई।
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