अभिजीत दीपके को मिला मां जैसा प्यार, भावुक होकर बोले- ‘बेंगलुरु में मिला मेरा नया परिवार…’

बेंगलुरु में दो दिन बिताने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शहर से विदा लेते हुए एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि यहां उन्हें जितना प्यार, अपनापन और सम्मान मिला, उसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। दीपके ने कविता लंकेश और ईशा लंकेश को अपना नया परिवार बताते हुए कहा कि वह बेंगलुरु से सिर्फ यादें लेकर नहीं, बल्कि ऐसे रिश्ते के साथ लौट रहे हैं, जो आगे भी उन्हें इस शहर से जोड़े रखेगा। दीपके बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश ने भी उनके प्रति स्नेह जताया। कविता ने कहा था कि अगर गौरी आज जीवित होतीं, तो वह दीपके को अपना दत्तक पुत्र घोषित कर देतीं और उनके साथ खड़ी होतीं।

अभिजीत दीपके ने बताया, बेंगलुरु में मिला नया परिवार

दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर बेंगलुरु के लोगों का आभार जताया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “बेंगलुरु से अपने दिल में ढेर सारा प्यार लेकर जा रहा हूं। पिछले दो दिनों में मुझे जो गर्मजोशी, स्नेह और दयालुता मिली है, वह सचमुच मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा है।” उन्होंने कविता लंकेश और ईशा लंकेश का जिक्र करते हुए उन्हें अपना नया परिवार बताया। दीपके के मुताबिक, वह बेंगलुरु एक अजनबी के रूप में आए थे, लेकिन अब ऐसे लोगों के साथ लौट रहे हैं, जिनसे उनका रिश्ता आगे भी बना रहेगा। उन्होंने उन्हें गले लगाने और भविष्य में फिर मिलने आने की बात भी कही। अपने संदेश में दीपके ने अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज तथा अपनी बड़ी बहन आफरीन नवाज को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों ने उन्हें बेंगलुरु आने के लिए आमंत्रित किया और शहर के लोगों से मिले असाधारण स्नेह और उदारता से परिचित कराया। दीपके ने यह भी कहा कि बेंगलुरु के लोगों ने उन्हें खूबसूरत यादों के साथ ऐसा घर दिया है, जहां वह दोबारा लौट सकते हैं।

कविता लंकेश ने गौरी लंकेश को याद करते हुए जताया स्नेह

कविता लंकेश ने आठ अक्टूबर को अपनी पोस्ट में अभिजीत दीपके के प्रति अपनापन जाहिर किया था। उन्होंने लिखा कि अगर उनकी बहन गौरी लंकेश आज जीवित होतीं, तो वह दीपके को अपना दत्तक पुत्र घोषित कर देतीं और उनके साथ मजबूती से खड़ी होतीं।

कविता ने अपने संदेश में प्रदर्शनकारियों के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही, उन्होंने लगातार सवाल उठाने, चुनौतियों का सामना करने और संघर्ष जारी रखने के लिए दीपके का धन्यवाद किया। अपने संदेश के अंत में उन्होंने उनके प्रति एकजुटता जताते हुए लिखा, “एकजुटता के साथ तुम्हारे साथ हूं, मेरे बेटे।” कविता का यह संदेश दीपके के बेंगलुरु दौरे के दौरान उनके प्रति जताए गए स्नेह का हिस्सा था। शहर से रवाना होते समय दीपके ने भी अपने संदेश में इस अपनत्व का उल्लेख किया।
SIR के विरोध में फ्रीडम पार्क में हुआ था प्रदर्शन

अभिजीत दीपके बेंगलुरु में जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, वह गुरुवार को फ्रीडम पार्क में आयोजित किया गया था। इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और मतदान के लिए कागजी मतपत्रों की व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम में 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया। राजनीतिक नारों और विरोध के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में एक ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ भी शामिल था। इसका आयोजन प्रगतिशील समूहों और विभिन्न नागरिक संगठनों के गठबंधन ने किया था। प्रदर्शन में युवाओं और जेन-जी कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भागीदारी रही।

ध्रुव राठी और प्रकाश राज भी हुए शामिल

इस प्रदर्शन में अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज के अलावा वरिष्ठ लेखक देवनूर महादेव भी मौजूद थे। लोकप्रिय यूट्यूबर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में किसी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में यह उनकी पहली भागीदारी थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी इसी कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु पहुंचे थे। दौरे के दौरान कविता लंकेश और ईशा लंकेश से मिले स्नेह का जिक्र करते हुए उन्होंने शहर को अपना नया परिवार बताया और यहां दोबारा लौटने की इच्छा जाहिर की।