अब AAP पर टूट का साया? राघव चड्ढा के बाद लोकसभा सांसद भी छोड़ सकते हैं पार्टी, मंत्री का बड़ा दावा

आम आदमी पार्टी को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर नए तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना यूबीटी में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अब दावा किया जा रहा है कि AAP के लोकसभा सांसद भी पार्टी छोड़कर नया राजनीतिक रुख अपना सकते हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बुधवार को इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के सांसद भी आने वाले समय में एनडीए के समर्थन में आ सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अन्य विपक्षी दलों में भी असंतोष बढ़ रहा है और कई सांसद सत्तापक्ष के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

इसी क्रम में रामदास आठवले ने 2019 के महाराष्ट्र राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय उद्धव ठाकरे के लिए एक बेहतर राजनीतिक अवसर मौजूद था, जिसे उन्होंने गंवा दिया। आठवले के अनुसार, यदि उस समय निर्णय अलग लिया गया होता तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते थे और उद्धव ठाकरे खुद उपमुख्यमंत्री की भूमिका में नजर आ सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में उद्धव ठाकरे के लिए अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे दावा किया कि विपक्षी खेमे से कई सांसदों का रुख बदल सकता है। उनके अनुसार, लोकसभा में मौजूद नौ सांसदों में से छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट के साथ जुड़ चुके हैं, जिससे एनडीए और महायुति की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में और भी राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो संसद में संख्यात्मक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

आम आदमी पार्टी को लेकर दिए गए बयान में रामदास आठवले ने यह भी कहा कि आने वाले समय में विपक्षी गठबंधन और कमजोर हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए के संपर्क में हैं और कुछ पहले ही समर्थन की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक को पारित कराने के बाद सत्ता पक्ष को दो-तिहाई बहुमत जैसी मजबूत स्थिति भी प्राप्त हो सकती है।
फिलहाल लोकसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद मौजूद हैं, जिनमें राज कुमार छब्बेवाल, गुरमीत सिंह हायर और मलविंदर सिंह कांग शामिल हैं। इसी संख्या को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है कि यदि किसी तरह की टूट होती है तो इसका असर विपक्षी समीकरणों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

इधर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी समान तरह के दावे सामने आ रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और राज्य सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के भीतर जल्द ही बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, कई नेता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और इन्हें राजनीतिक बयानबाजी बताया है। वहीं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद और नेता जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं।

उधर, शिवसेना यूबीटी से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। बुधवार को उस समय स्थिति और स्पष्ट होती नजर आई जब पार्टी के बागी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अलग-अलग मुलाकात की। बागी गुट की ओर से यह दावा किया गया कि उन्हें लोकसभा में पार्टी के नौ सांसदों में से छह का समर्थन प्राप्त है, जिससे उनकी स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में इस पूरे मामले पर एक औपचारिक बैठक भी हो सकती है, जिसमें बागी सांसद अलग गुट के रूप में मान्यता और संभावित विलय को लेकर अपनी मांग रख सकते हैं। यह बैठक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, शिवसेना यूबीटी के प्रमुख नेता अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस पूरे मामले में किसी भी प्रकार का निर्णय संविधान, नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही लिया जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की संवैधानिक जटिलता उत्पन्न न हो।