भारत में विवाह को केवल सामाजिक नहीं, बल्कि एक पवित्र और आजीवन निभाए जाने वाले बंधन के रूप में देखा जाता है। यहां शादी को सात जन्मों का साथ माना जाता है और इसे परिवारों के बीच स्थायी रिश्ते की नींव समझा जाता है। हालांकि, दुनिया के कई पश्चिमी देशों में विवाह को लेकर सोच काफी अलग है। बदलती जीवनशैली और रिश्तों को लेकर बदलते नजरिए के बीच वहां समय-समय पर नए ट्रेंड सामने आते रहते हैं। इन दिनों ऐसा ही एक कॉन्सेप्ट काफी चर्चा में है, जिसे 'स्टार्टर मैरिज' कहा जा रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर यह क्या है और इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है।
क्या होती है 'स्टार्टर मैरिज'?'स्टार्टर मैरिज' विवाह से जुड़ा एक ऐसा विचार है, जिसमें पहली शादी को जीवनभर का रिश्ता मानने के बजाय एक शुरुआती अनुभव के रूप में देखा जाता है। आमतौर पर ऐसी शादी पांच साल या उससे कम समय तक चलती है। यदि इस दौरान दोनों साथी महसूस करते हैं कि वे लंबे समय तक साथ नहीं रह सकते, तो बिना बच्चों के आपसी सहमति से अलग हो जाते हैं। इसके बाद दोनों उस रिश्ते से मिले अनुभवों को सीख मानकर भविष्य में नया और अधिक परिपक्व रिश्ता बनाने की कोशिश करते हैं।
भारत में इस तरह की सोच अभी बहुत सीमित है। यहां अधिकांश लोग विवाह को स्थायी संस्था मानते हैं, जबकि पश्चिमी देशों में व्यक्तिगत पसंद और रिश्तों को लेकर अपेक्षाकृत अधिक खुला नजरिया देखने को मिलता है। यही कारण है कि भारत में 'स्टार्टर मैरिज' जैसी अवधारणा अभी व्यापक रूप से स्वीकार नहीं की गई है।
इस शब्द की शुरुआत कब और कैसे हुई?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 'स्टार्टर मैरिज' शब्द का सबसे पहले उल्लेख The New York Times में किया गया था। वर्ष 1994 में पत्रकार डेबोरा शूपैक (Deborah Shupack) ने अपने एक लेख में इस शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि उस समय यह अवधारणा सीमित चर्चा में रही, लेकिन हाल के वर्षों में बदलते रिश्तों और विवाह संबंधी सोच के कारण यह शब्द फिर से सुर्खियों में आ गया है।
सोशल मीडिया और रिलेशनशिप से जुड़े प्लेटफॉर्म्स पर भी अब इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है। कई लोग इसे आधुनिक दौर की वास्तविकता मानते हैं, जबकि कुछ इसे पारंपरिक विवाह व्यवस्था के लिए चुनौती के रूप में देखते हैं।
'स्टार्टर मैरिज' का उद्देश्य क्या माना जाता है?इस अवधारणा को अपनाने वाले कुछ लोगों का मानना है कि विवाह से पहले या शुरुआती वर्षों में साथ रहकर यह समझा जा सकता है कि दोनों की सोच, जीवनशैली और भविष्य की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से मेल खाती हैं या नहीं। उनके अनुसार, यदि रिश्ता सफल रहता है तो इसे आगे बढ़ाया जाता है, लेकिन यदि लगातार मतभेद बने रहते हैं तो अलग होने का फैसला लिया जाता है।
आमतौर पर इस तरह के रिश्ते की अवधि पांच साल या उससे कम मानी जाती है। इस दौरान दोनों साथी अपने रिश्ते को समझने और परखने की कोशिश करते हैं। यदि उन्हें लगता है कि साथ आगे बढ़ना संभव नहीं है, तो वे आपसी सहमति से तलाक लेकर अलग-अलग जीवन की शुरुआत कर देते हैं। वहीं, अगर रिश्ता मजबूत साबित होता है और दोनों एक-दूसरे के साथ सहज महसूस करते हैं, तो वे उसी विवाह को लंबे समय तक जारी रखने का फैसला भी कर सकते हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 'स्टार्टर मैरिज' कोई कानूनी श्रेणी या आधिकारिक विवाह व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक अवधारणा (social concept) है, जिसकी चर्चा मुख्य रूप से पश्चिमी देशों में बदलते रिश्तों के संदर्भ में की जाती है। अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों में विवाह को लेकर मान्यताएं और दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं।