घूमने जा रहे हैं पड़ोसी देश नेपाल, जरूर करें इन धार्मिक स्थलों के दर्शन

भारत का सुगम पड़ोसी देश नेपाल हैं जहां आप आसानी से बस के द्वारा भी घूमने जा सकते हैं। नेपाल दुनिया का एक बहुत ही खूबसूरत देश है जिसको ‘दुनिया की छत’ के रूप में भी जाना जाता है। कुछ लोग यहां के बड़े-बड़े पर्वतों के आकर्षण में आते हैं तो कई लोग हिमालय में चढ़ाई या ट्रेकिंग करने के लिए नेपाल आते हैं। वहीँ नेपाल अपनी अपनी संस्कृति और आध्यात्म के मामले में भारत से बहुत मेल खाता है जहां हिंदू धर्म के कई देवी-देवताओं के बहुत पुराने मंदिर हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचते हैं। आज इस कड़ी में हम आपको नेपाल के कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों की जानकारी लेकर आए हैं जिनका दर्शन करना आपके सफ़र को यादगार बना सकता हैं। आइये जानते हैं इनके बारे में...

जानकी मंदिर

रामायण काल में मिथिला के राजा जनक थे। उनकी राजधानी का नाम जनकपुर है। जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किलोमीटर दक्षिण पूरब में बसा है। यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। इस नगर में ही माता सीता ने अपना बचपन बिताया था। कहते हैं कि यहीं पर उनका विवाह भी हुआ। विवाह पंचमी के अवसर पर लोग अक्सर इस मंदिर में आते हैं। कहते हैं कि भगवान राम ने इसी जगह पर शिव धनुष तोड़ा था। यहां मौजूद एक पत्थर के टुकड़े को उसी धनुष का अवशेष कहा जाता है। यहां धनुषा नाम से विवाह मंडप स्थित है इसी में विवाह पंचमी के दिन पूरी रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया जाता है।

मुक्तिनाथ मंदिर

नेपाल के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक मुक्तिनाथ मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है, जिसमें शालिग्राम भगवान की पूजा होती है। इस मंदिर की स्थिति नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में होने की वजह से इस पूरे क्षेत्र को मुक्ति क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। अगर हिंदू धर्म की बात करें, तो हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार इस इस क्षेत्र पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मुक्ति यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है। नेपाल के इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता काफी कठिन होने के बावजूद भी भारी संख्या में हिंदू धर्म के लोग इस मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। इस मंदिर में दर्शन करने वाले हिंदू श्रद्धालुओं की सूची में भारत के भी काफी सारे श्रद्धालु शामिल होते हैं।

पशुपतिनाथ मंदिर

पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल के सबसे पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है जो काठमांडू शहर से 3 किलोमीटर दूर पूर्व में सुंदर और पवित्र बागमती नदी के किनारे पर बसा हुआ है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जहाँ पर रोज हजारों की संख्या में भक्त आते हैं। पशुपतिनाथ मंदिर आश्रमों के साथ एक बड़े हिस्से में फैला हुआ है जो यहां आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को एक अलग शांति का अनुभव करवाता है। साल 1979 में पशुपतिनाथ मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया था। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग बॉडी का सिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिंग से बना हुआ है। नेपाल में साल 2015 में एक भयंकर भूकंप आया था, जिसकी वजह से इस मंदिर की कुछ बाहरी इमारतें ध्वस्त हो गई थी लेकिन इस मंदिर का गर्भग्रह अब भी सुरक्षित है।

मनकामना मंदिर

मनकामना माता मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग 105 किमी दूर स्थित है। इस मंदिर के पीछे एक कहानी है कि सालों पहले एक किसान ने गलती से एक पत्थर को चोट मार दी थी और अचानक उस पत्थर से खून और दूध एक साथ निकलने लगे थे। इसलिए यहां लोगों ने माता का मंदिर बनावाया। यहां के लोग पत्थर को देवी का अवतार मानते हैं। लोग कहते हैं कि यहां सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मन्नत पूरी हो जाती है। दशहरा पूजा के दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की बहुत भीड़ होती है। अष्टमी पूजा के दौरान यहां बली चढ़ाने की भी परंपरा है।

स्वयंभूनाथ स्तूप

स्वयंभूनाथ काठमाण्डू नगर के पश्चिम में एक पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन बौद्ध स्तूप है। बौद्ध धर्म के अनुयायी नेवारी लोगों के दैनिक जीवन में स्वयंभूनाथ का केन्द्रीय स्थान है। यह स्थान उनके लिये सबसे पवित्र बौद्ध स्थल है। तिब्बती लोगों तथा तिब्बती बौद्ध-धर्म के अनुयायियों के लिये बौद्धनाथ के बाद इसका ही स्थान है। विश्व धरोहर में सम्मिलित स्वयंभू विश्व के सबसे भव्य बौद्ध स्थलों में से एक है। इसका संबंध काठमांडू घाटी के निर्माण से जोड़ा जाता है। काठमांडू से तीन किलोमीटर पश्चिम में घाटी से 77 मी। की ऊंचाई पर स्थित है स्वयंभू। इसके चारों ओर बनी आंखों के बार में माना जाता है कि ये गौतम बुद्ध की हैं जो चारों दिशाओं में देख रही हैं।

चांगुनारायण मन्दिर

नेपाल की राजधानी काठमांडू के चंगु गांव में स्थित इस मंदिर को 325 ईसवी में बनवाया गया था। चौथी शताब्दी के दौरान निर्मित इस मंदिर को भगवान विष्णु के सबसे प्राचीन मंदिरों के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर की वास्तुकला नेपाली शैली पर आधारित है। ऐतिहासिक महत्व और भव्य शैली के कारण यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में इस मंदिर को शामिल किया गया है। इस मंदिर के अंदर रुद्राक्ष के पेड़ भी लगे हैं।

महादेवी शक्तिपीठ

इस शक्तिपीठ को 3 स्थानों पर माना जाता है। पहला उग्रतारा मंदिर, सहरसा बिहार, दूसरा जयमंगला देवी मंदिर समस्तीपुर, बिहार और तीसरा वनदुर्गा मंदिर जनकपुर नेपाल। इसमें से नेपाल की मान्यता ज्यादा है। भारत-नेपाल सीमा पर जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट मिथिला में माता का बायां स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को महोदर कहते हैं। नेपाल के जनकपुर से 15 किलोमीटर पूर्व की ओर मधुबनी के उत्तर पश्चिम में उच्चैठ नामक स्थान का वनदुर्गा मंदिर है यही मुख्य शक्तिपीठ है।

बुढानीलकंठ मंदिर

नेपाल के शिवपुरी नामक पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ यह मंदिर काठमांडू शहर से मात्र 9 किमी। की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। लोगों का कहना है कि इस मंदिर को यहां के राजपरिवार के लिए स्थापित किया गया था। इस मंदिर के बारे में बताई जाने वाली पौराणिक मान्यता यह है कि इस मंदिर में जाकर भगवान विष्णु के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना को विष्णु जी पूरा करते हैं। इस मंदिर में विराजमान भगवान विष्णु जी की यह मूर्ति कुंड के ऊपर सोती हुई अवस्था में विराजमान है, जो इस मंदिर को अन्य मंदिरों से काफी अलग बनाता है। इस मंदिर में दर्शन करने भारतीय श्रद्धालु भी जाते हैं।