गर्दन के पीछे कूबड़ जैसा दिख रहा है? इसे नजरअंदाज न करें, जानें कारण और बचाव के तरीके

गर्दन के ठीक नीचे पीठ के ऊपरी हिस्से में कूबड़ जैसा उभार दिखाई देने पर कई लोग इसे गलत तरीके से बैठने या लंबे समय तक मोबाइल चलाने का नतीजा मान लेते हैं। कुछ मामलों में खराब पोस्चर और रीढ़ के ऊपरी हिस्से में ज्यादा झुकाव इसकी वजह हो सकते हैं, लेकिन हर उभार का कारण एक जैसा नहीं होता। कहीं यह रीढ़ की बनावट में बदलाव से जुड़ा हो सकता है, तो कहीं गर्दन के पीछे चर्बी जमा होने के कारण ऐसा दिखाई दे सकता है। इसलिए केवल उभार देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि तीन एक्सरसाइज करने से वह पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

अगर उभार खराब पोस्चर और मांसपेशियों की कमजोरी से जुड़ा है, तो कुछ स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम गर्दन-पीठ की अकड़न कम करने और शरीर की स्थिति सुधारने में मदद कर सकते हैं। लेकिन रीढ़ की हड्डियों में बदलाव या गर्दन के पीछे चर्बी जमा होने पर इलाज उसके कारण के अनुसार तय किया जाता है।

गर्दन के पीछे कूबड़ जैसा उभार बनने के क्या कारण हैं?

खराब पोस्चर: लंबे समय तक सिर आगे झुकाकर बैठना, लैपटॉप की स्क्रीन नीचे रखना और कंधों को लगातार आगे की ओर झुकाए रखना शरीर की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों में पीठ के ऊपरी हिस्से का झुकाव बढ़ सकता है। हालांकि, हर उभार का कारण केवल बैठने का तरीका नहीं होता।
रीढ़ की हड्डियों में बदलाव: पीठ के ऊपरी हिस्से की रीढ़ सामान्य से अधिक बाहर की ओर मुड़ जाए, तो इसे काइफोसिस (Kyphosis) कहा जाता है। उम्र बढ़ने, रीढ़ की हड्डियों के कमजोर होने, ऑस्टियोपोरोसिस या कुछ अन्य स्थितियों के कारण ऐसा हो सकता है। कुछ लोगों को इसके साथ पीठ में दर्द और अकड़न भी महसूस होती है।

गर्दन के पीछे चर्बी जमा होना: गर्दन और कंधों के बीच चर्बी जमा होने से भी कूबड़ जैसा उभार दिखाई दे सकता है। इसे मेडिकल भाषा में डॉर्सोसर्विकल फैट पैड कहा जाता है। इसके पीछे शरीर में चर्बी का बढ़ना, कुछ दवाएं या हार्मोन से जुड़ी स्थितियां जैसे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसका इलाज कारण पर निर्भर करता है।

गर्दन और पीठ के पोस्चर के लिए 3 एक्सरसाइज


इन व्यायामों से खराब पोस्चर से जुड़ी परेशानी में मदद मिल सकती है, लेकिन इन्हें हर प्रकार के कूबड़ का इलाज न समझें। यदि उभार का कारण स्पष्ट नहीं है या गर्दन-पीठ में दर्द रहता है, तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें।

1. चिन टक एक्सरसाइज

उद्देश्य:
सिर और गर्दन की स्थिति सुधारने में मदद

कुर्सी पर पीठ सीधी रखकर बैठें और नजर सामने रखें। अब ठुड्डी को नीचे झुकाए बिना धीरे-धीरे सिर को पीछे की ओर खींचें, जैसे हल्का डबल चिन बन रहा हो। कुछ सेकंड रुकें और फिर सिर को सामान्य स्थिति में ले आएं। इस दौरान गर्दन को जोर से पीछे न मोड़ें और न ही सिर को ऊपर-नीचे झटकें। शुरुआत हल्के और आरामदायक मूवमेंट से करें। अगर दर्द या चक्कर महसूस हो, तो व्यायाम रोक दें। गर्दन को पीछे खींचने वाला यह अभ्यास सिर की स्थिति सुधारने के लिए फिजियोथेरेपी में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. चेस्ट स्ट्रेच
उद्देश्य: छाती की मांसपेशियों में खिंचाव कम करने और कंधों की गतिशीलता में मदद

दरवाजे के फ्रेम के पास खड़े हों। दोनों हाथ फ्रेम पर रखें और कोहनियों को आरामदायक स्थिति में मोड़ें। अब शरीर को धीरे-धीरे थोड़ा आगे ले जाएं, जब तक छाती के सामने हल्का खिंचाव महसूस न हो। कुछ सेकंड रुकने के बाद शुरुआती स्थिति में लौट आएं। स्ट्रेच करते समय शरीर को जोर से आगे न धकेलें। खिंचाव हल्का होना चाहिए, दर्दनाक नहीं। यदि कंधे या गर्दन में दर्द बढ़े, तो इसे रोक दें। छाती की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाला यह अभ्यास पोस्चर सुधारने के लिए सुझाए जाने वाले व्यायामों में शामिल है।

3. स्कैपुलर स्क्वीज

उद्देश्य
: पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय करना

सीधे बैठें या आराम से खड़े हो जाएं। दोनों हाथ शरीर के पास रखें और कंधों को कानों की ओर उठाए बिना कंधों की हड्डियों को धीरे-धीरे एक-दूसरे की तरफ खींचें। कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और फिर मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें। इस दौरान कमर को जरूरत से ज्यादा न मोड़ें और कंधों पर जोर न डालें। शुरुआत कुछ बार दोहराने से करें और अपनी सुविधा के अनुसार आगे बढ़ें। इस व्यायाम से पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करने और कंधों की स्थिति पर काम करने में मदद मिल सकती है।

एक्सरसाइज के साथ रोजमर्रा की आदतों में करें ये बदलाव

- लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन को इस तरह रखें कि उसे देखने के लिए बार-बार गर्दन नीचे न झुकानी पड़े।
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बजाय बीच-बीच में उठें और शरीर को आराम दें।
- बैठते समय सिर को आगे की ओर निकालने के बजाय गर्दन और पीठ को आरामदायक स्थिति में रखने की कोशिश करें।
- व्यायाम धीरे-धीरे करें। दर्द बढ़ने पर जबरदस्ती जारी न रखें।
रीढ़ की सेहत के लिए मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम और पोस्चर सुधारने की गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस या रीढ़ की हड्डियों में बदलाव होने पर व्यायाम का चुनाव सावधानी से करना जरूरी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लें।

गर्दन के पीछे उभार होने पर डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि गर्दन के पीछे उभार नया है, बढ़ता जा रहा है या उसके साथ लगातार दर्द और अकड़न हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराएं। हाथों में सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। उभार के कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।