नाना पाटेकर की कार्डियक अरेस्ट से मौत, जानें क्यों शुरुआती 5 मिनट बेहद अहम, CPR हो सकता है जीवनरक्षक

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नाना पाटेकर को घर पर अचानक गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। डॉक्टर शेखर सालकर, जो मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख हैं, के अनुसार नाना पाटेकर को करीब 45 मिनट तक लगातार CPR दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अभिनेता का निधन सुबह 5:20 बजे हुआ।

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट ऐसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक और अप्रत्याशित रूप से शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है। इसके चलते मस्तिष्क और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त की आपूर्ति रुक सकती है या बहुत कम हो सकती है। इस स्थिति में दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है और मरीज का ब्लड प्रेशर तथा पल्स भी बंद हो जाता है। कुछ तरह के एरिथमिया यानी दिल की धड़कन की अनियमितताएं कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं। ऐसी स्थिति में दिल शरीर के बाकी हिस्सों तक पर्याप्त खून पहुंचाना बंद कर देता है। कार्डियक अरेस्ट को हार्ट अटैक से अलग स्थिति माना जाता है। इसमें दिल की पंपिंग अचानक बंद होने के कारण मरीज की जान जाने का खतरा बेहद गंभीर होता है और तत्काल मदद की जरूरत पड़ती है।

अचानक कार्डियक अरेस्ट के पीछे कई कारण हो सकते हैं

संदर्भ में दी गई जानकारी के अनुसार, सोते समय अचानक होने वाली मौतों के पीछे कुछ मामलों में एरिथमिया को कारण माना जाता है। इसी तरह डांस, जिम, साइकिल चलाने या किसी अन्य शारीरिक गतिविधि के दौरान अचानक गिरने और मौत होने के मामलों में लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम जैसी स्थितियों का संबंध बताया गया है। जेनेटिक सिंड्रोम भी दिल की धड़कन रुकने का एक कारण हो सकते हैं। इसके अलावा खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से भी हृदय संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं। संदर्भ में हाई सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट का भी उल्लेख किया गया है। जिन लोगों के परिवार में हृदय संबंधी बीमारी का इतिहास रहा हो, उनके लिए इस तरह की जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।
कार्डियक अरेस्ट में CPR क्यों अहम है?

कार्डियक अरेस्ट के दौरान तत्काल CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन शुरू करना महत्वपूर्ण होता है। इसका उद्देश्य मरीज के शरीर में रक्त संचार बनाए रखने में मदद करना है, ताकि अस्पताल पहुंचने तक मस्तिष्क और दूसरे जरूरी अंगों को कुछ रक्त प्रवाह मिलता रहे।

संदर्भ में बताए गए तरीके के अनुसार, CPR में मरीज की छाती के बीच वाले हिस्से पर दोनों हाथों से लगातार चेस्ट कंप्रेशन दिए जाते हैं। इसके लिए एक हाथ को आगे रखकर उसके ऊपर दूसरा हाथ रखा जाता है और उंगलियों को आपस में बंद किया जाता है। इसके बाद छाती के बीच में लगातार दबाव दिया जाता है। चेस्ट कंप्रेशन लगातार एक लय में किए जाने चाहिए। संदर्भ में 100 से 120 कंप्रेशन प्रति मिनट की गति का उल्लेख किया गया है। इसके बाद सांस देने की प्रक्रिया का भी उल्लेख है और 30 कंप्रेशन के बाद सांस देने का तरीका बताया गया है।

शुरुआती मिनटों में मदद मिलना बेहद जरूरी

संदर्भ में दी गई स्टडीज की जानकारी के मुताबिक, अगर कार्डियक अरेस्ट के करीब 5 मिनट के भीतर सही तरीके से CPR शुरू कर दिया जाए और मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना हो सकती है। नाना पाटेकर के मामले में भी डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन के बाद सामने आई यह जानकारी कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता और ऐसी स्थिति में तत्काल मेडिकल सहायता की जरूरत को रेखांकित करती है।