अब तक गर्भनिरोध की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं पर ही रही है, लेकिन वैज्ञानिक पुरुषों के लिए भी नए विकल्प विकसित करने में जुटे हैं। इसी दिशा में एक ऐसी प्रयोगात्मक गर्भनिरोधक गोली पर काम हो रहा है, जिसे शारीरिक संबंध बनाने से करीब 30 मिनट पहले लेने की योजना है। यह दवा हार्मोन में बदलाव करने के बजाय कुछ समय के लिए स्पर्म यानी शुक्राणुओं की गति को प्रभावित कर सकती है। इससे उनके अंडे तक पहुंचने की क्षमता कम हो सकती है और गर्भधारण की संभावना घट सकती है। हालांकि, यह गोली अभी शोध के शुरुआती चरण में है। इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने से पहले इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाले संभावित असर की जांच जरूरी होगी। गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला अस्पताल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरुणा कालरा के मुताबिक, पुरुषों के लिए ऐसा विकल्प गर्भनिरोध की जिम्मेदारी दोनों पार्टनर के बीच बांटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। लेकिन इसके वास्तविक उपयोग से पहले कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं।
कैसे काम करेगी पुरुषों की यह गर्भनिरोधक गोली?
अमेरिका के वील कॉर्नेल मेडिसिन के वैज्ञानिक ऐसी दवा विकसित कर रहे हैं, जो पुरुषों के शरीर में मौजूद एक खास एंजाइम को निशाना बनाती है। इस एंजाइम का नाम सॉल्युबल एडेनिलेट साइक्लेज (sAC) है। शुक्राणुओं को आगे बढ़ने और अंडे तक पहुंचने के लिए इसकी जरूरत होती है। प्रयोग के तौर पर तैयार की जा रही दवा इस एंजाइम की गतिविधि को कुछ समय के लिए रोक सकती है। ऐसा होने पर शुक्राणु अपनी सामान्य गति से आगे नहीं बढ़ पाते और उनकी अंडे तक पहुंचने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। साल 2023 में प्रकाशित शुरुआती शोध में sAC एंजाइम को रोकने से जानवरों पर किए गए प्रयोगों में शुक्राणुओं की गति रुकने और गर्भधारण न होने के परिणाम सामने आए थे।
शारीरिक संबंध बनाने से 30 मिनट पहले लेनी होगी गोली?इस प्रयोगात्मक गोली की एक खास बात यह है कि इसे रोजाना लेने के बजाय जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने की योजना है। वील कॉर्नेल के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे शारीरिक संबंध बनाने से करीब 30 मिनट पहले लेने का विचार है। शुरुआती शोध के आधार पर दवा का असर लगभग छह से आठ घंटे तक रहने की संभावना बताई गई है। इसके बाद शुक्राणुओं की सामान्य गतिविधि और प्रजनन क्षमता लौटने की उम्मीद है। इस तरह की दवा सफल होती है, तो पुरुषों को हर दिन गर्भनिरोधक गोली लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, छह से आठ घंटे के असर और 30 मिनट पहले लेने की बात अभी शोधकर्ताओं की विकसित की जा रही दवा से जुड़ी है। इंसानों में परीक्षण के बाद ही इसकी वास्तविक खुराक, असर शुरू होने का समय और सुरक्षा की पुष्टि हो सकेगी।
क्या यह गोली शुक्राणु बनना बंद कर देगी?इस दवा का उद्देश्य पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं का बनना पूरी तरह रोकना नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य sAC एंजाइम को कुछ समय के लिए निष्क्रिय करके शुक्राणुओं की गति को प्रभावित करना है। यानी दवा के असर के दौरान शुक्राणु आगे बढ़ने में सक्षम नहीं रहेंगे या उनकी गति बाधित होगी, जिससे अंडे तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। दवा का असर खत्म होने के बाद शुक्राणुओं की सामान्य गति लौटने की उम्मीद है। यही इस शोध का महत्वपूर्ण पहलू है। वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दवा का प्रभाव अस्थायी हो और उसका असर खत्म होने के बाद पुरुषों की प्रजनन क्षमता सामान्य रूप से वापस आ जाए।
इंसानों पर परीक्षण से पहले किन बातों की जांच होगी?किसी भी नई गर्भनिरोधक दवा को इस्तेमाल की मंजूरी देने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित करना जरूरी होता है। इस गोली के मामले में भी वैज्ञानिकों को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करनी होगी। सबसे पहले यह देखना होगा कि दवा शरीर के अलग-अलग अंगों पर क्या असर डालती है और इसकी कौन-सी खुराक सुरक्षित रहेगी। 23 अक्टूबर 2026 को वील कॉर्नेल मेडिसिन को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट से चार साल के लिए 8.2 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। इस राशि से दवा के टॉक्सिसिटी और सुरक्षा संबंधी परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद स्वस्थ पुरुषों पर पहले चरण का क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। इस परीक्षण में प्रतिभागियों को दवा या प्लेसीबो दिया जाएगा और उनके शुक्राणुओं की गति के साथ संभावित दुष्प्रभावों पर नजर रखी जाएगी।
वैज्ञानिकों को यह भी पता लगाना होगा कि दवा का असर कितनी जल्दी शुरू होता है और कितनी देर तक बना रहता है। इसके अलावा बार-बार इस्तेमाल करने पर शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी होगी। फिलहाल इंसानों में इस दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित नहीं हुई है।
पुरुषों की फर्टिलिटी पर क्या पड़ेगा असर?पुरुष गर्भनिरोधक गोली को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इसका असर खत्म होने के बाद प्रजनन क्षमता पहले जैसी रहेगी या नहीं। चूंकि इस दवा का लक्ष्य शुक्राणुओं की गति को अस्थायी रूप से प्रभावित करना है, इसलिए वैज्ञानिकों को यह साबित करना होगा कि इसका प्रभाव स्थायी नहीं होता। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दवा का असर कुछ घंटों में खत्म होने और उसके बाद प्रजनन क्षमता सामान्य होने की उम्मीद है। लेकिन इस संभावना की पुष्टि इंसानों पर होने वाले परीक्षणों से ही हो सकेगी। वैज्ञानिक यह भी जांचेंगे कि दवा का बार-बार इस्तेमाल करने पर शुक्राणुओं की सामान्य गतिविधि और फर्टिलिटी पर कोई लंबे समय का असर तो नहीं पड़ता।
क्या यह गोली प्रेग्नेंसी रोकने में प्रभावी होगी?किसी दवा का जानवरों पर सफल होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह इंसानों में भी उतनी ही प्रभावी साबित होगी। पैंगोंग झील की तरह इस दवा के नतीजों को लेकर भी अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिकों को क्लिनिकल ट्रायल में यह देखना होगा कि दवा लेने वाले पुरुषों में गर्भधारण की संभावना कितनी कम होती है। इसके साथ ही अलग-अलग लोगों में दवा का असर एक जैसा रहता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। यह पता करना जरूरी होगा कि निर्धारित समय तक शुक्राणुओं की गति रोकने के बाद भी गर्भनिरोध का प्रभाव बना रहता है या नहीं। इन परीक्षणों के नतीजों के आधार पर ही इसकी वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकेगा।
गर्भनिरोध की जिम्मेदारी में आ सकता है बदलावअगर यह गोली आगे चलकर सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो गर्भनिरोध के विकल्पों में एक नया रास्ता खुल सकता है। फिलहाल पुरुषों के लिए गर्भनिरोध के प्रमुख विकल्प कंडोम और नसबंदी हैं, जबकि महिलाओं के पास कई तरह के हार्मोनल और अन्य विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में पुरुषों के लिए जरूरत के अनुसार इस्तेमाल की जा सकने वाली गोली आने से कपल्स को एक और विकल्प मिल सकता है। इसका एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि गर्भनिरोध की जिम्मेदारी केवल महिलाओं पर निर्भर न रहे। दोनों पार्टनर अपनी जरूरत और सहमति के आधार पर गर्भनिरोध का तरीका चुन सकेंगे। हालांकि, इससे महिलाओं के लिए मौजूद गर्भनिरोधक तरीकों की जरूरत खत्म नहीं होगी। हर व्यक्ति और कपल की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए सही विकल्प का चुनाव डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।
यौन संक्रमण से बचाव नहीं करेगी यह गोलीयह समझना जरूरी है कि पुरुषों के लिए विकसित की जा रही इस गोली का उद्देश्य केवल गर्भधारण को रोकना है। इससे एचआईवी समेत अन्य यौन संचारित संक्रमणों से सुरक्षा नहीं मिलेगी। ऐसे संक्रमणों से बचाव के लिए कंडोम का इस्तेमाल जरूरी रहेगा। फिलहाल यह दवा प्रयोगात्मक अवस्था में है। अक्टूबर 2026 में वील कॉर्नेल मेडिसिन को मिले नए अनुदान के बाद इसके टॉक्सिसिटी और सुरक्षा परीक्षणों की तैयारी आगे बढ़ेगी। इसके बाद इंसानों पर पहला क्लिनिकल ट्रायल करने की योजना है। इसलिए अभी इसे बाजार में उपलब्ध गर्भनिरोधक विकल्प नहीं माना जा सकता।