छाती और कंधों में लचीलापन बढ़ाने के लिए करें गोमुखासन, जानें सही तरीका और सावधानियां

आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत मुद्रा में बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी कंधों, गर्दन और पीठ में अकड़न की वजह बन सकती है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गोमुखासन भी ऐसा ही एक बैठकर किया जाने वाला योगासन है, जिसमें कंधों, छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से पर खिंचाव महसूस होता है।
गोमुखासन का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें 'गो' का अर्थ गाय और 'मुख' का अर्थ चेहरा या मुंह होता है। इस आसन में शरीर की मुद्रा गाय के चेहरे जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है। इसका अभ्यास करते समय पैरों को मोड़कर बैठा जाता है और दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर आपस में मिलाने की कोशिश की जाती है। इस मुद्रा में छाती खुलती है और कंधों के आसपास के हिस्से में खिंचाव महसूस हो सकता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोमुखासन बैठकर किए जाने वाले महत्वपूर्ण योगासनों में शामिल है। इसे खास तौर पर छाती और कंधों से संबंधित अभ्यास के रूप में देखा जाता है। हालांकि, इसके लाभ व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, अभ्यास के तरीके और नियमितता पर निर्भर कर सकते हैं।

1. कंधों और गर्दन की अकड़न कम करने में मदद


लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करने और लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से कंधों और गर्दन के आसपास तनाव महसूस हो सकता है। गोमुखासन में दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाने से कंधों के आसपास खिंचाव पैदा होता है। सही तरीके से इसका अभ्यास करने पर कंधों की गतिशीलता और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इस आसन को करते समय हाथों को धीरे-धीरे पीठ के पीछे ले जाएं। एक हाथ ऊपर से और दूसरा नीचे से ले जाकर दोनों हाथों को मिलाने की कोशिश करें। शुरुआत में हाथ आपस में नहीं मिलते हैं, तो उन्हें जबरदस्ती खींचने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार मुद्रा बनाएं। अगर कंधे या गर्दन में दर्द महसूस हो, तो अभ्यास रोक दें।

2. छाती को खोलने और ऊपरी पीठ में खिंचाव के लिए उपयोगी

गोमुखासन में हाथों को पीठ के पीछे ले जाने और छाती को सहज रूप से खोलने की कोशिश की जाती है। इससे छाती, कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव महसूस हो सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा और कंधों की गतिशीलता बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। इस आसन को करते समय पीठ को यथासंभव सीधा रखें और छाती को सहज रूप से आगे की ओर खोलें। शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। अगर हाथों को पीछे ले जाने में परेशानी होती है, तो किसी योग स्ट्रैप या रूमाल की मदद ली जा सकती है। इससे हाथों को आपस में मिलाने के लिए जबरदस्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती।
3. सांस लेने की प्रक्रिया को सहज बनाने में सहायक

गोमुखासन के दौरान छाती को खोलकर बैठने से सांस लेने की मुद्रा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जब शरीर को सहज स्थिति में रखा जाता है, तो छाती और कंधों के आसपास खिंचाव महसूस हो सकता है। इस तरह का अभ्यास कुछ लोगों को सांस लेने में सहजता महसूस कराने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि गोमुखासन करने मात्र से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है या शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह निश्चित रूप से बेहतर हो जाता है। इसी तरह, अस्थमा या सांस से जुड़ी किसी बीमारी का यह उपचार नहीं है। अगर आपको सांस फूलने, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी होती है, तो योग को चिकित्सा का विकल्प न मानें और डॉक्टर की सलाह लें।

4. पीठ की मुद्रा बेहतर बनाए रखने में मदद

गलत तरीके से बैठने की आदत से पीठ और कंधों में तनाव महसूस हो सकता है। गोमुखासन में रीढ़ को सीधा रखते हुए बैठने का अभ्यास किया जाता है। इससे शरीर की मुद्रा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पीठ के ऊपरी हिस्से में लचीलेपन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इस आसन को करते समय शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें। पीठ को जबरदस्ती सीधा करने या कंधों को जरूरत से ज्यादा पीछे खींचने की कोशिश न करें। नियमित अभ्यास के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है।

गोमुखासन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप पहली बार गोमुखासन कर रहे हैं, तो शुरुआत में दोनों हाथों का पीठ के पीछे आपस में मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी योग स्ट्रैप या रूमाल का सहारा लिया जा सकता है। हाथों को जबरदस्ती खींचने या कंधों पर अधिक दबाव डालने से बचें।
जिन लोगों के घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट है, उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान दर्द या असहजता महसूस होने पर तुरंत रुक जाएं।