ग्लूट ब्रिज एक ऐसी आसान एक्सरसाइज है जिसे बिना किसी खास उपकरण के घर पर भी किया जा सकता है। इसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ा जाता है और पैरों को जमीन पर टिकाकर कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है। सही तरीके से करने पर यह एक्सरसाइज ग्लूट्स यानी कूल्हों की मांसपेशियों के साथ कोर, हैमस्ट्रिंग और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को भी सक्रिय करती है। यह एक्सरसाइज खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपने निचले शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए एक आसान व्यायाम को नियमित कसरत में शामिल करना चाहते हैं। इसे करने के लिए ज्यादा जगह या उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ग्लूट ब्रिज कूल्हों की स्थिरता और रोजमर्रा की गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली मांसपेशियों की ताकत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
ग्लूट ब्रिज से कौन से फायदे मिल सकते हैं?
1. ग्लूट्स को मजबूत करने में मददग्लूट ब्रिज का मुख्य लक्ष्य ग्लूटल मांसपेशियां हैं। कूल्हों को ऊपर उठाते समय इन मांसपेशियों को सक्रिय करना पड़ता है। नियमित शक्ति-प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में यह व्यायाम निचले शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद कर सकता है।
2. हैमस्ट्रिंग पर भी काम करता हैग्लूट्स के अलावा पैरों के पीछे मौजूद हैमस्ट्रिंग मांसपेशियां भी इस गतिविधि में शामिल होती हैं। इसलिए ग्लूट ब्रिज केवल कूल्हों की मांसपेशियों तक सीमित व्यायाम नहीं है, बल्कि निचले शरीर की कई मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है।
3. कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करता हैग्लूट ब्रिज करते समय पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने से शरीर को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इस वजह से यह व्यायाम कोर की स्थिरता पर भी काम करता है।
4. कूल्हों की स्थिरता में मददग्लूट्स शरीर के निचले हिस्से को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्लूट ब्रिज इन मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ कूल्हों की स्थिरता पर भी काम कर सकता है।
5. रोजमर्रा की गतिविधियों में उपयोगीमजबूत ग्लूट्स का इस्तेमाल चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने की स्थिति से उठने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों में होता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ग्लूट ब्रिज इन कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
ग्लूट ब्रिज करने का सही तरीका क्या है?ग्लूट ब्रिज करते समय केवल कूल्हों को ऊपर उठाना पर्याप्त नहीं है। सही मुद्रा और नियंत्रित गति पर ध्यान देना जरूरी है।
- सबसे पहले पीठ के बल फर्श पर लेट जाएं और हाथों को शरीर के दोनों ओर आराम से रखें।
- दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर सपाट रखें। पैरों के बीच लगभग कूल्हों जितनी दूरी रखें।
- एड़ियों को शरीर के काफी पास रखें, लेकिन ऐसी स्थिति चुनें जिसमें आप आराम से व्यायाम कर सकें।
- पेट की मांसपेशियों को हल्का कसें और सांस रोकें नहीं।
- अब एड़ियों पर दबाव डालते हुए ग्लूट्स को कसें और कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- ऊपर जाते समय शरीर को घुटनों से कंधों तक एक सीधी तिरछी रेखा में रखने की कोशिश करें।
- ऊपर की स्थिति में कुछ सेकंड रुकें और ग्लूट्स को सक्रिय रखें।
- इसके बाद कूल्हों को धीरे-धीरे नीचे लाएं और शुरुआती स्थिति में लौट आएं।
- कूल्हों को बहुत ऊपर उठाने की जरूरत नहीं
ग्लूट ब्रिज में एक आम गलती कूल्हों को जरूरत से ज्यादा ऊपर उठाना है। इससे कमर के निचले हिस्से में जरूरत से ज्यादा खिंचाव या पीछे की ओर झुकाव हो सकता है। व्यायाम के दौरान कमर को अनावश्यक रूप से मोड़ने के बजाय कूल्हों की गति और ग्लूट्स को सक्रिय करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर ग्लूट ब्रिज करते समय हैमस्ट्रिंग में ऐंठन होने लगे तो पैरों की स्थिति को थोड़ा बदलकर एड़ियों को ग्लूट्स के करीब लाने की कोशिश की जा सकती है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पैरों की स्थिति बदलने और एड़ियों से दबाव देने पर ध्यान देने से इस समस्या में मदद मिल सकती है।
शुरुआत कितनी बार करें?शुरुआत करने वाले लोग कम दोहराव से शुरू कर सकते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे इसे बढ़ा सकते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक की एक हालिया गाइड में दो सेट में 15 ग्लूट ब्रिज करने का उदाहरण दिया गया है, जबकि अन्य व्यायाम मार्गदर्शिकाएं शुरुआती लोगों को 10 दोहराव से शुरू करने की सलाह देती हैं। इसलिए संख्या तय करते समय अपनी फिटनेस और व्यायाम के अनुभव को ध्यान में रखना जरूरी है।
जब सामान्य ग्लूट ब्रिज आसानी से होने लगे तो इसे कठिन बनाने के लिए रेजिस्टेंस बैंड, सिंगल-लेग ब्रिज या अन्य बदलाव किए जा सकते हैं। हालांकि, कठिन रूप अपनाने से पहले सामान्य ग्लूट ब्रिज की मुद्रा और नियंत्रण पर पकड़ होना जरूरी है।
दर्द होने पर व्यायाम रोकेंग्लूट ब्रिज सामान्य रूप से आसान एक्सरसाइज है, लेकिन इसे करते समय कमर या कूल्हे में दर्द महसूस होना सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। अगर व्यायाम के दौरान दर्द हो तो इसे रोकना चाहिए। चोट, हाल की सर्जरी या पीठ, पेट, कूल्हे, घुटने अथवा टखने से जुड़ी समस्या होने पर इस तरह की एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना उचित है।