शरीफा यानी सीताफल का मौसम आते ही बाजार में इसकी मांग बढ़ जाती है। स्वाद में मीठा और गूदे में मलाईदार यह फल सिर्फ खाने में ही पसंद नहीं किया जाता, बल्कि इसमें कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसमें आहार फाइबर, विटामिन C, विटामिन B6, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसी वजह से इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
शरीफे में कौन-कौन से पोषक तत्व मिलते हैंशरीफा को अंग्रेजी में कस्टर्ड एप्पल या शुगर एप्पल कहा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार इसे सीताफल और शरीफा जैसे नामों से भी जाना जाता है और भारत में इसकी खेती व्यापक रूप से की जाती है। इसका गूदा आमतौर पर ताजा खाया जाता है, जबकि इससे आइसक्रीम, मिल्क शेक और दूसरी खाद्य चीजें भी तैयार की जाती हैं। इस फल की खासियत इसका पोषण प्रोफाइल है। उपलब्ध पोषण आंकड़ों के अनुसार 100 ग्राम शरीफे में लगभग 101 कैलोरी, 25.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2.4 ग्राम आहार फाइबर, 382 मिलीग्राम पोटैशियम, 18 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 19.2 मिलीग्राम विटामिन C पाया जाता है। इसमें विटामिन B6 सहित कुछ अन्य विटामिन और खनिज भी मौजूद होते हैं।
पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है फाइबरशरीफे में मौजूद आहार फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। पर्याप्त फाइबर वाला आहार आंतों की नियमित गतिविधि बनाए रखने और कब्ज से बचाव में मदद कर सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में शरीफा खाने से रोजाना के आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि किसी एक फल को कब्ज, गैस या पेट की किसी समस्या का इलाज मानना सही नहीं होगा। पाचन संबंधी लगातार परेशानी होने पर उसके कारण की जांच जरूरी होती है।
विटामिन C से मिलता है पोषणशरीफा विटामिन C का भी स्रोत है। यह विटामिन शरीर के सामान्य प्रतिरक्षा कार्य के लिए जरूरी है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है। शरीफे में विटामिन C के साथ कई पौधों से मिलने वाले यौगिक भी पाए जाते हैं। 2025 में प्रकाशित एक समीक्षा में Annona squamosa में फेनोलिक यौगिकों और फ्लेवोनॉयड जैसे जैव सक्रिय घटकों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। हालांकि प्रयोगशाला स्तर पर किसी पौधे के यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट या अन्य जैविक गतिविधि पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि फल किसी बीमारी का इलाज करता है। इस तरह के स्वास्थ्य दावों के लिए मनुष्यों में पर्याप्त नैदानिक प्रमाण जरूरी होते हैं।
पोटैशियम और मैग्नीशियम भी मौजूदशरीफे में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज भी पाए जाते हैं। ये दोनों शरीर के सामान्य मांसपेशी और तंत्रिका कार्य सहित कई शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी पोषक तत्व हैं। इसलिए फल के रूप में शरीफा संतुलित खान-पान में इन पोषक तत्वों का योगदान कर सकता है। हालांकि सिर्फ शरीफा खाने से ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी बीमारी को नियंत्रित करने का दावा नहीं किया जा सकता। किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और निर्धारित उपचार जरूरी है।
शरीर को ऊर्जा देने वाले पोषक तत्व भी मिलते हैंशरीफा प्राकृतिक रूप से मीठा फल है और इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी अच्छी होती है। इसलिए यह आहार में ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ के रूप में शामिल हो सकता है। साथ ही इसमें फाइबर भी होता है, जिससे यह केवल मीठे स्वाद वाला खाद्य पदार्थ नहीं रह जाता, बल्कि कुछ जरूरी पोषक तत्व भी उपलब्ध कराता है। 2025 की एक व्यापक समीक्षा में शरीफे में मौजूद पोषक तत्वों के साथ फेनोलिक यौगिक, फ्लेवोनॉयड, टेरपेनॉयड और अन्य जैव सक्रिय घटकों का भी उल्लेख किया गया है। समीक्षा में इनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर उपलब्ध शोध की चर्चा की गई, लेकिन साथ ही यह भी बताया गया कि मनुष्यों में इनके प्रभाव और सुरक्षा को लेकर अभी और अध्ययन की जरूरत है।
मधुमेह में मात्रा का ध्यान रखना जरूरीशरीफा मीठा फल है, इसलिए मधुमेह वाले लोगों को इसकी मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। किसी व्यक्ति के लिए फल की उचित मात्रा उसकी पूरी डाइट, दवाओं और रक्त शर्करा की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। इसलिए मधुमेह की स्थिति में शरीफे को पूरी तरह प्रतिबंधित करने या इसे बीमारी के इलाज के तौर पर लेने के बजाय अपनी व्यक्तिगत आहार योजना के अनुसार इसकी मात्रा तय करना बेहतर है।
सबसे जरूरी बात: बीज न खाएंशरीफा खाते समय इसके बीजों को पूरी तरह अलग करना जरूरी है। उपलब्ध चिकित्सा-संबंधी जानकारी के अनुसार शरीफे के बीज खाने योग्य नहीं हैं और उनमें विषैले यौगिक पाए जाते हैं। इसलिए गूदा खाते समय बीज निगलने से बचना चाहिए। शरीफे पर उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य में इसके पोषण और पौधों में मौजूद जैव सक्रिय यौगिकों से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन किया गया है, लेकिन शोधकर्ताओं ने भी कई क्षेत्रों में आगे नैदानिक और विष-विज्ञान संबंधी अध्ययन की जरूरत बताई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार शरीफा भारत में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसलों में शामिल है और इसकी बेहतर किस्मों पर भी काम हुआ है। ICAR के विकसित ‘अरका सहन’ शरीफा की औसत फल-उत्पादन क्षमता और कम बीज वाली विशेषताओं को भी दर्ज करता है।