अगर आप सोच रहे हैं कि यह समस्या सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित है, तो अब यह धारणा बदलने का समय है। हम बात कर रहे है युवाओं में तेजी से बढ़ते कोलन कैंसर के मामलों की, जो चिंता का विषय बन चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके शुरुआती संकेत बेहद साधारण होते हैं और अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। लेकिन जब तक मरीज को इसकी गंभीरता का एहसास होता है, तब तक कई बार कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है, जिससे बचने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी को पहचानना इसलिए भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि इसके शुरुआती संकेत न तो बहुत दर्दनाक होते हैं और न ही बहुत स्पष्ट। इसी वजह से लोग इन्हें सामान्य समस्या समझकर टालते रहते हैं। ब्रिस्टल स्थित द लैगॉम क्लिनिक के जीपी डॉ. जैक ओग्डेन का कहना है कि कोलन कैंसर के कई शुरुआती संकेत इतने हल्के होते हैं कि व्यक्ति उन्हें गंभीरता से नहीं लेता। यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है।
ये हैं 5 साइलेंट संकेतसबसे पहला संकेत शरीर में आयरन की कमी या एनीमिया का होना है। अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान महसूस हो, त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे या हल्की-सी मेहनत में सांस फूलने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह अंदरूनी रक्तस्राव का संकेत हो सकता है, जो ट्यूमर की वजह से होता है।
दूसरा महत्वपूर्ण लक्षण है मल त्याग की आदतों में बदलाव। जैसे बार-बार कब्ज या दस्त होना, या फिर स्टूल का आकार असामान्य रूप से पतला हो जाना। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आंत में किसी प्रकार की रुकावट बन रही है, जो ट्यूमर के कारण हो सकती है।
तीसरा संकेत है अचानक और बिना कारण वजन कम होना। यदि आप अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं कर रहे हैं, फिर भी वजन तेजी से घट रहा है, तो यह शरीर के अंदर किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई बार ट्यूमर की वजह से शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता।
चौथा लक्षण पेट से जुड़ी परेशानियों से जुड़ा होता है। जैसे लगातार पेट दर्द, ऐंठन या बहुत कम खाने पर भी पेट भरा-भरा महसूस होना। यह संकेत भी पाचन तंत्र में किसी गड़बड़ी की ओर इशारा कर सकता है।
मल में खून आना—सबसे गंभीर चेतावनीपांचवां और सबसे अहम संकेत है मल में खून आना। यदि स्टूल का रंग काला या गहरा लाल नजर आए, तो यह शरीर के अंदर कहीं ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह बवासीर या अन्य सामान्य समस्याओं के कारण भी हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। खासकर स्टूल टेस्ट और अन्य मेडिकल जांच के जरिए सही स्थिति का पता लगाना जरूरी है। समय पर पहचान और इलाज ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।