बार-बार टूटते हैं नाखून? आयरन समेत इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह

नाखूनों का बार-बार टूटना, किनारों से उखड़ना या कमजोर होकर मुड़ जाना केवल सुंदरता से जुड़ी परेशानी नहीं है। कई बार इसके पीछे रोजमर्रा की आदतें होती हैं, तो कभी शरीर में पोषक तत्वों की कमी या कोई स्वास्थ्य समस्या इसकी वजह बन सकती है। नाखून केराटिन नाम के प्रोटीन से बने होते हैं और उनकी मजबूती बनाए रखने के लिए शरीर को संतुलित पोषण की जरूरत होती है। अगर आपके नाखून पहले की तुलना में ज्यादा कमजोर हो गए हैं या उनकी परतें बार-बार निकलने लगती हैं, तो इसकी वजह समझना जरूरी है। हालांकि, हर बार नाखून टूटने का मतलब पोषक तत्वों की कमी होना नहीं है। आइए जानते हैं कि किन पोषक तत्वों का नाखूनों की सेहत से संबंध है, कौन-सी आदतें उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं और उन्हें मजबूत रखने के लिए क्या किया जा सकता है।

किन पोषक तत्वों की कमी से कमजोर हो सकते हैं नाखून?

नाखूनों की संरचना केराटिन नाम के प्रोटीन से होती है। इन्हें स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में आयरन, प्रोटीन, जिंक और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की भूमिका होती है। अगर शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो नाखूनों की बनावट और मजबूती प्रभावित हो सकती है।

आयरन की कमी

आयरन की कमी नाखूनों के कमजोर होने की एक संभावित वजह है। इसकी कमी होने पर नाखून पतले और भंगुर हो सकते हैं। कुछ मामलों में नाखूनों का आकार बदलकर चम्मच जैसा हो सकता है, यानी उनके बीच का हिस्सा अंदर की ओर धंसा हुआ दिखाई दे सकता है। अगर नाखून टूटने के साथ लगातार थकान, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलने जैसी परेशानी भी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करवाना उचित है। इन लक्षणों का संबंध आयरन की कमी से हो सकता है, हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

प्रोटीन, जिंक और विटामिन बी12

नाखूनों की मजबूती के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी है, क्योंकि नाखून केराटिन नाम के प्रोटीन से बनते हैं। इसी तरह जिंक और विटामिन बी12 भी शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली और स्वस्थ ऊतकों को बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं। इन पोषक तत्वों की कमी होने पर स्वास्थ्य पर अलग-अलग तरह से असर पड़ सकता है।

बायोटिन यानी विटामिन बी7 का नाम भी अक्सर कमजोर नाखूनों के संबंध में लिया जाता है। हालांकि, इसकी वास्तविक कमी बहुत कम लोगों में होती है। इसलिए नाखून टूटने की समस्या होने पर बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के बायोटिन या दूसरे सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं है।

नाखूनों के टूटने के पीछे ये आदतें और स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं

हर बार नाखून कमजोर होने की वजह शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती। कई बार रोजमर्रा के कामों के दौरान नाखूनों का बार-बार पानी के संपर्क में आना भी उन्हें नुकसान पहुंचाता है। हाथ धोने, बर्तन साफ करने और कपड़े धोने के दौरान नाखून बार-बार गीले होते हैं और फिर सूखते हैं। इस प्रक्रिया से उनकी बाहरी परत कमजोर हो सकती है और वे आसानी से टूटने या उखड़ने लगते हैं। डिटर्जेंट, सैनिटाइजर और नेल पॉलिश रिमूवर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी नाखूनों को रूखा और कमजोर बना सकता है। सर्दियों या शुष्क मौसम में नाखूनों में नमी की कमी होने से यह परेशानी और बढ़ सकती है।

कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी नाखूनों की बनावट पर असर डाल सकती हैं। उदाहरण के लिए, थायराइड से जुड़ी गड़बड़ी के साथ नाखूनों में बदलाव दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति में बाल झड़ना, सामान्य से ज्यादा ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ नाखूनों का कमजोर होना और उनकी वृद्धि धीमी पड़ना भी संभव है।

नाखूनों को मजबूत रखने के लिए खानपान और देखभाल में करें ये बदलाव

नाखूनों की सेहत के लिए संतुलित आहार लेना और रोजमर्रा की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। अपने भोजन में अंडे, दालें, पालक, मेवे और बीज जैसी चीजों को शामिल करें। ये शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन सी वाली चीजें, जैसे नींबू या आंवला, खाना भी उपयोगी हो सकता है। विटामिन सी शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करता है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और नाखूनों के साथ उनके आसपास की त्वचा यानी क्यूटिकल पर हल्का तेल या हैंड क्रीम लगाएं, ताकि रूखापन कम करने में मदद मिले।

नाखूनों को उचित लंबाई में छोटा रखें। इससे उनके किसी चीज में अटकने और टूटने की आशंका कम हो सकती है। बर्तन धोते या डिटर्जेंट के साथ काम करते समय दस्ताने पहनें, ताकि नाखूनों का पानी और सफाई वाले उत्पादों से संपर्क कम हो। नाखूनों को दांत से काटने या उनका इस्तेमाल बोतल, पैकेट अथवा दूसरी चीजें खोलने के लिए करने की आदत भी छोड़ दें, क्योंकि इससे वे टूट सकते हैं। अगर कई हफ्तों तक देखभाल करने के बाद भी नाखूनों की स्थिति में सुधार नहीं होता, उनका रंग बदलने लगता है या आकार बिगड़ने लगता है, तो डॉक्टर से सलाह लें। नाखूनों में बदलाव के साथ थकान या बाल झड़ने जैसी परेशानी भी हो, तो जांच करवाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर लक्षणों के आधार पर पोषक तत्वों की कमी या थायराइड जैसी समस्या की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।