शराब का नियमित सेवन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर जिन अंगों पर पड़ता है, उनमें लिवर प्रमुख है। लिवर शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने, भोजन के पाचन में मदद करने और कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को संचालित करने का काम करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार अधिक मात्रा में शराब पीता है, तो लिवर को उसे प्रोसेस करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। धीरे-धीरे इसकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर शराब पीने के कितने साल बाद लिवर खराब होने लगता है? इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। लिवर पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में और कितनी बार शराब पीता है। इसके अलावा उम्र, लिंग, शरीर का वजन, आनुवंशिक कारण और पहले से मौजूद लिवर संबंधी बीमारियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ लोगों में अधिक शराब पीने के कुछ ही दिनों में लिवर में फैट जमा होना शुरू हो सकता है, जबकि गंभीर नुकसान विकसित होने में लंबे समय तक शराब का सेवन जारी रह सकता है।
कुछ ही दिनों या हफ्तों में जमा हो सकता है लिवर में फैटशराब से लिवर को होने वाले नुकसान की शुरुआती स्थिति अल्कोहलिक फैटी लिवर या अल्कोहल से जुड़ा फैटी लिवर डिजीज कहलाती है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। अधिक मात्रा में शराब पीने से यह बदलाव कुछ ही दिनों में भी शुरू हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति का लिवर एक निश्चित समय में खराब हो जाएगा। इस शुरुआती स्थिति की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ज्यादातर लोगों को इसके लक्षण महसूस नहीं होते। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता हो सकती है, लेकिन कई बार व्यक्ति सामान्य महसूस करता रहता है। ऐसे में बिना जांच के लिवर में जमा फैट का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती फैटी लिवर में सुधार संभव है। अगर शराब पूरी तरह छोड़ दी जाए, तो लिवर में जमा फैट कम हो सकता है। इसलिए इस स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
लगातार शराब पीने से बढ़ सकता है लिवर में सूजन का खतरा
अगर कोई व्यक्ति फैटी लिवर होने के बावजूद अधिक मात्रा में शराब पीना जारी रखता है, तो लिवर की कोशिकाओं को और नुकसान पहुंच सकता है। इससे लिवर में सूजन विकसित होने का खतरा रहता है। शराब से जुड़ी इस गंभीर स्थिति को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस कहा जाता है।इस बीमारी में लिवर की कोशिकाओं में सूजन और क्षति होने लगती है। इसके कारण भूख कम लगना, कमजोरी, थकान और पेट में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ सकता है, जिसे पीलिया कहा जाता है। अल्कोहलिक हेपेटाइटिस लंबे समय तक अधिक शराब पीने वाले लोगों में विकसित हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में कम अवधि में बहुत ज्यादा शराब पीने के बाद भी गंभीर समस्या सामने आ सकती है। इसलिए इसे केवल कई साल तक शराब पीने से जुड़ी बीमारी मानना सही नहीं है।
कई साल तक शराब पीने से हो सकता है लिवर सिरोसिसअगर लिवर में बार-बार सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की प्रक्रिया जारी रहती है, तो धीरे-धीरे वहां निशान बनने लगते हैं। इस स्थिति में स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू लेने लगता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर लिवर सिरोसिस विकसित हो सकता है। सिरोसिस अल्कोहल से जुड़ी लिवर बीमारी की गंभीर अवस्था है। इसमें लिवर की सामान्य संरचना और काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। एक बार सिरोसिस विकसित हो जाने पर लिवर पर बने निशान आमतौर पर पूरी तरह ठीक नहीं होते। बीमारी बढ़ने पर पेट में पानी जमा होना, त्वचा में खुजली, पेशाब का रंग गहरा होना और आंखों या त्वचा में पीलापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति में फैटी लिवर से हेपेटाइटिस और फिर सिरोसिस तक बीमारी पहुंचे। लेकिन लगातार अधिक शराब पीना इस खतरे को बढ़ाता है। सिरोसिस का जोखिम व्यक्ति की शराब पीने की आदतों के साथ-साथ दूसरे स्वास्थ्य और आनुवंशिक कारकों पर भी निर्भर करता है।
क्या शराब छोड़ने के बाद दोबारा ठीक हो सकता है लिवर?
लिवर की एक खासियत यह है कि शुरुआती नुकसान के बाद उसमें खुद को सुधारने की क्षमता होती है। अगर किसी व्यक्ति को अल्कोहलिक फैटी लिवर है और वह शराब पूरी तरह छोड़ देता है, तो लिवर में जमा फैट कम हो सकता है। शुरुआती सूजन के मामलों में भी शराब छोड़ने और उचित इलाज से सुधार संभव है। हालांकि, जब बीमारी सिरोसिस तक पहुंच जाती है, तो लिवर में बने निशान पूरी तरह खत्म नहीं होते। ऐसी स्थिति में शराब छोड़ना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे बीमारी के आगे बढ़ने का खतरा कम करने और लिवर की बची हुई कार्यक्षमता को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। अगर आप नियमित रूप से शराब पीते हैं, तो केवल किसी लक्षण के सामने आने का इंतजार न करें। डॉक्टर की सलाह से लिवर की जांच करवाना जरूरी है। इसके लिए जरूरत के अनुसार लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की जा सकती हैं। शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने से समय पर जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।