महिलाओं के पीरियड्स पर कमेंट करने वालों से बोले विजय वर्मा- ‘ये आपकी दुनिया नहीं है’, ‘रेड फ्लैग’ टैग से भी थके

बॉलीवुड अभिनेता विजय वर्मा ने महिलाओं की सुरक्षा, उनकी आवाज और अपनी बात रखने की आजादी को लेकर खुलकर बात की है। हाल के दिनों में दिल्ली और बिहार में महिलाओं के खिलाफ सामने आए मामलों के बीच महिलाओं के अनुभवों और अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हुई है। इसी संदर्भ में विजय ने पुरुषों की सोच और उनके व्यवहार पर बात करते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी बात कहने के लिए पुरुषों की अनुमति या दखल की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक पुरुषों के लिए जरूरी है कि वे महिलाओं की बात सुनें, उन्हें समझने की कोशिश करें और बिना जज किए अपनी बात रखने की आजादी दें।

महिलाओं की बात सुनने की जरूरत पर क्या बोले विजय वर्मा

विजय वर्मा का कहना है कि पुरुषों को महिलाओं के रास्ते से हट जाना चाहिए, खासकर तब जब वे अपने अनुभव और विचार साझा कर रही हों। उनके मुताबिक परेशानी तब शुरू होती है जब पुरुष यह मानने लगते हैं कि महिलाओं के फैसलों और विचारों पर उनकी भी राय या अधिकार होना चाहिए। अभिनेता ने कहा कि महिलाओं को अपनी पसंद और अनुभव खुलकर साझा करने की जगह मिलनी चाहिए। उन्हें जज करना, उनका मजाक उड़ाना या उन्हें कमतर महसूस कराना सही नहीं है। विजय के मुताबिक एक पुरुष के तौर पर महिलाओं के लिए सबसे अच्छी चीज यह हो सकती है कि उनकी बात सुनी जाए और उनसे सीखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के उन अनुभवों को समझने की कोशिश की जानी चाहिए, जिनका पुरुषों को व्यक्तिगत अनुभव नहीं होता। उनके अनुसार किसी ऐसे विषय पर, जिसे पुरुष खुद अनुभव नहीं कर सकते, महिलाओं की बात सुनना और उसे समझने की कोशिश करना ज्यादा जरूरी है।

पीरियड्स पर महिलाओं की पोस्ट में क्यों नहीं करनी चाहिए दखलअंदाजी


विजय ने पुरुषों की परवरिश को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि लड़कों को संवेदनशीलता और अपनी सीमाओं को समझने की सीख पर्याप्त रूप से मिलनी चाहिए और इसकी शुरुआत घर से हो सकती है। उन्होंने ‘मेरा राजा बेटा’ वाली परवरिश का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में लड़कों को जिस तरह की परवरिश मिलती है, उसका असर आगे उनके व्यवहार पर पड़ सकता है। सोशल मीडिया का उदाहरण देते हुए विजय ने कहा कि जब कोई लड़की पीरियड्स के दर्द या अपने किसी निजी अनुभव के बारे में ऑनलाइन बात करती है तो कई लड़के वहां भी अपनी टिप्पणी करने लगते हैं। उनका कहना है कि हर जगह अपनी राय देना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनुभव आपका नहीं है और आप उसे समझते भी नहीं हैं, तो उस बातचीत में दखल देने के बजाय महिलाओं को अपनी बात कहने देना चाहिए।
‘रेड फ्लैग’ और ‘ग्रीन फ्लैग’ जैसे टैग से थक चुके हैं विजय

विजय वर्मा ने अपने फिल्मी किरदारों को लेकर मिलने वाले ‘रेड फ्लैग’ टैग पर भी बात की। हाल ही में एक कार्यक्रम में कंटेंट क्रिएटर डॉली सिंह ने उन्हें स्क्रीन पर ‘सबसे बड़ा रेड फ्लैग’ बताया था। यह टिप्पणी विजय के उन किरदारों के संदर्भ में थी, जिनमें वह ग्रे या नकारात्मक शेड में नजर आए हैं। इनमें ‘डार्लिंग्स’, ‘दहाड़’ और ‘पिंक’ जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि विजय इस टिप्पणी से असहज नजर आए। अब अभिनेता ने ऐसे टैग को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विजय ने कहा कि वह ‘रेड फ्लैग’ और ‘ग्रीन फ्लैग’ जैसे लेबल से थक चुके हैं और अब उन्हें कोई दूसरा रंग चाहिए। यानी वह अपने किरदारों को लगातार इन दो श्रेणियों में बांटे जाने से अलग नजरिया चाहते हैं।

‘लस्ट स्टोरीज 3’ का किरदार विजय को क्यों लगा अलग

विजय ने यह भी बताया कि शायद यही वजह है कि उन्हें ‘लस्ट स्टोरीज 3’ में निभाया गया अपना किरदार पसंद आया। उनके मुताबिक इस किरदार की खासियत यह थी कि उसे सामने वाले व्यक्ति के संकेत ही समझ नहीं आते थे। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने अब तक कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जिन्हें सामने वाले व्यक्ति की ओर से बहुत सारे संकेत मिलते हैं। लेकिन ‘लस्ट स्टोरीज 3’ के किरदार में संकेतों को समझ न पाने वाली बात उनके लिए अलग और ताजा अनुभव थी। यही पहलू इस किरदार को उनके पिछले काम से अलग बनाता है।