टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बड़ा एक्शन, सभी आरोपियों पर लगा मकोका

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सख्त कर दी है। पुलिस ने इस केस में सभी आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), 1999 के तहत भी मामला दर्ज किया है। इससे पहले आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मकोका लगाने की अनुमति के लिए पुलिस ने सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मांगी थी। मंगलवार को अनुमति मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ इस कानून की धाराएं जोड़ दीं। पुलिस को आशंका है कि फायरिंग की घटना के पीछे संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

18 अक्टूबर को जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई थी फायरिंग


यह घटना 18 अक्टूबर को मुंबई के पॉश जुहू इलाके में हुई थी। जानकारी के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल क्लब से अपनी कार में घर लौट रहे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार हमलावरों ने उनकी चलती कार पर पांच से छह राउंड गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गए। इस हमले में टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बच गए। हालांकि, गोलीबारी के दौरान उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और हमलावरों की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की।
सोनीपत और दिल्ली समेत कई जगहों पर हुई छापेमारी

फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए हरियाणा के सोनीपत, दिल्ली और अन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। शुरुआती जांच के दौरान रेहान उर्फ सुक्का, फूल सिंह और ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन के नाम सामने आए। पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि वारदात को अंजाम देने वाले लोगों को हथियार कहां से मिले और हमले की योजना बनाने में किन लोगों की भूमिका थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गोलीबारी किसी संगठित आपराधिक साजिश का हिस्सा थी या नहीं।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े व्यक्ति ने किया था जिम्मेदारी लेने का दावा

मामले की जांच के दौरान सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित की ओर से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया था। पुलिस इस दावे और घटना के पीछे संभावित आपराधिक नेटवर्क के संबंधों की जांच कर रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे के आधार पर किसी की भूमिका को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियां वारदात में शामिल लोगों, हथियारों की आपूर्ति और कथित आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ मकोका की धाराएं जोड़े जाने के बाद अब जांच का दायरा संगठित अपराध की संभावित भूमिका तक बढ़ गया है। पुलिस का मुख्य जोर हमले की पूरी साजिश का पता लगाने और यह निर्धारित करने पर है कि घटना को अंजाम देने में किसकी क्या भूमिका रही।