आज के समय में मानसिक तनाव और भावनात्मक दबाव से निपटने के लिए लोग अक्सर थेरेपी और काउंसलिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन अभिनेत्री Neetu Kapoor की सोच इस विषय में थोड़ी अलग रही है। उनका कहना है कि वह व्यक्तिगत रूप से थेरेपी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहतीं। उनके अनुसार, जीवन में ऐसे भरोसेमंद दोस्त और परिवार का होना ज्यादा जरूरी है, जिनके साथ इंसान खुलकर अपने मन की बात साझा कर सके।
हाल ही में Soha Ali Khan के पॉडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ में पहुंचीं नीतू कपूर ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को याद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पति Rishi Kapoor के निधन के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया था। उन्होंने कहा, “वह समय मेरे लिए बेहद कठिन था और उस दौरान कई लोगों ने मुझे थेरेपी लेने की सलाह दी थी। मैंने एक थेरेपिस्ट से बातचीत भी की, लेकिन मुझे यह तरीका अपने लिए सहज नहीं लगा।”
नीतू कपूर ने आगे कहा कि उनके लिए असली सहारा हमेशा दोस्त और परिवार रहे हैं। उनके मुताबिक, “हर इंसान के पास चार-पांच ऐसे करीबी लोग होने चाहिए जिनसे वह बिना झिझक हर बात कह सके। जब आप अपने दर्द को किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करते हैं तो मन हल्का हो जाता है और कई बार वही सबसे बड़ी थेरेपी बन जाती है।”
दोस्तों और परिवार को बताया सबसे मजबूत सहाराउन्होंने यह भी बताया कि ऋषि कपूर के जाने के बाद वह भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट गई थीं। उस समय वह खुद को बेहद अकेला महसूस करती थीं। नीतू कपूर के अनुसार, जब वह थेरेपी के लिए जाती थीं तो अक्सर उनके मन में सवाल उठता था कि क्या यह उनके लिए सही रास्ता है। उन्होंने कहा, “जब तक इंसान खुद से यह फैसला नहीं करता कि उसे मजबूत बनना है, तब तक कोई भी पूरी तरह उसे संभाल नहीं सकता।”
उन्होंने यह भी साझा किया कि थेरेपी के दौरान उन्हें मेडिटेशन, काउंटिंग और कई मानसिक अभ्यास सुझाए गए, लेकिन वह उन्हें अपने लिए प्रभावी महसूस नहीं कर पाईं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति का दुख से बाहर निकलने का तरीका अलग होता है, और सभी के लिए एक ही समाधान काम नहीं करता।
नीतू कपूर ने कहा कि उनके लिए काम, परिवार और दोस्तों का साथ सबसे बड़ा सहारा साबित हुआ। व्यस्त रहने से उन्हें मानसिक मजबूती मिली और अपनों के साथ समय बिताने से धीरे-धीरे वह उस कठिन दौर से बाहर निकल पाईं।
गौरतलब है कि Rishi Kapoor का अप्रैल 2020 में कैंसर के कारण निधन हो गया था, जिसके बाद पूरा कपूर परिवार एक गहरे भावनात्मक संकट से गुजरा था।