नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका 4 अक्टूबर को गोवा में दिया गया भाषण चर्चा में है। निधन से महज चार दिन पहले एक कार्यक्रम में अभिनेता ने जिंदगी और मौत को लेकर अपनी सोच साझा की थी। उन्होंने कहा था कि किसी को नहीं पता कि वह अगले दिन मौजूद रहेगा या नहीं, लेकिन हर इंसान को अपने जीवन में यह जरूर देखना चाहिए कि उसने क्या करने की कोशिश की।
गोवा टूरिज्म के कार्यक्रम में नाना पाटेकर गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद थे। ‘सिदादे डी गोवा, डोना पाउला’ में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। इसी दौरान नाना ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने करीबी दोस्त रहे मनोहर पर्रिकर को याद किया और उनके व्यक्तित्व तथा काम करने के जज्बे की चर्चा की।
मनोहर पर्रिकर को याद कर नाना ने कही ये बातनाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का जिक्र करते हुए मनोहर पर्रिकर को अपना दोस्त बताया। उन्होंने कहा कि पर्रिकर उनसे उम्र में छोटे थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व और बड़प्पन के कारण हमेशा उन्हें सम्मान की नजर से देखना पड़ता था। नाना ने कहा, “मनोहर पर्रिकर मेरे दोस्त थे। ऐसे दोस्त पर गर्व होना चाहिए।” उन्होंने पर्रिकर के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि गोवा और देश का यह सौभाग्य था कि ऐसा इंसान यहां पैदा हुआ, जिसने कुछ करने का सपना देखा और उसे पूरा करने की कोशिश की। अभिनेता ने कहा कि मनोहर पर्रिकर ने कम उम्र में काफी कुछ किया और फिर दुनिया से चले गए। उनके भीतर कुछ करने का जुनून था और वह अपने काम को लेकर लगातार प्रयास करते थे।
‘जाना तो सबको है, मैं भी कल रहूं या न रहूं’भाषण के दौरान नाना पाटेकर ने अपनी उम्र और जीवन के अंत को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि किसी को नहीं पता कि अगले दिन वह इस दुनिया में रहेगा या नहीं। नाना ने कहा, “जाना तो सबको है। मैं भी कल रहूं या न रहूं, कुछ पता नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी में वह समय आना तय है। उन्होंने बताया कि वह 77 साल के हो चुके हैं और उनका 78वां साल शुरू होने वाला है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके लिए अहम सवाल यह था कि इंसान ने अपनी जिंदगी में आखिर क्या करने की कोशिश की।
‘खुद से पूछना चाहिए कि जो करना था, क्या कर पा रहे हैं’नाना पाटेकर ने अपने भाषण में जीवन को सिर्फ व्यक्तिगत दायरे तक सीमित रखने के सवाल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए कि जिंदगी में जो करना था, क्या वह कर पा रहा है और क्या उसने उसे हासिल करने के लिए कोशिश की। उनका कहना था कि अगर किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी सिर्फ उसके बच्चों, पत्नी और घर तक सीमित रह जाती है, तो उसके जीवन का दायरा भी उतना ही सीमित रह जाता है। नाना की यह बातें उस कार्यक्रम में उनके जीवन को लेकर विचारों का हिस्सा थीं, जहां उन्होंने मनोहर पर्रिकर के जीवन और उनके काम करने के जुनून को भी याद किया था। नाना पाटेकर का निधन कार्यक्रम में दिए इस भाषण के चार दिन बाद हुआ। उनके निधन के बाद उनका यह संदेश एक बार फिर चर्चा में आया है, जिसमें उन्होंने जीवन के अंत की अनिश्चितता के साथ-साथ इस सवाल पर जोर दिया था कि इंसान ने अपनी जिंदगी में क्या करने की कोशिश की।