नाना पाटेकर ने किसान परिवारों की मदद के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, लेखक रणबीर पुष्प ने सुनाया किस्सा

नाना पाटेकर को उनके अभिनय के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता रहा है। उनके निधन के बाद उनसे जुड़ा एक पुराना किस्सा सामने आया है, जिसमें बताया गया था कि उन्होंने किसान परिवारों की मदद के लिए 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने का फैसला तक बदल दिया था। यह किस्सा लेखक रणबीर पुष्प ने एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया था। रणबीर पुष्प ने बातचीत में नाना पाटेकर को लेकर बनी उस धारणा पर भी बात की थी, जिसमें उनके गुस्सैल स्वभाव के कारण प्रोड्यूसर्स को नुकसान होने के दावे किए जाते रहे हैं। उन्होंने इन दावों को गलत बताया था और नाना के सामाजिक सरोकारों से जुड़ा यह प्रसंग सुनाया था।

किसान परिवारों की खबर देखकर बदल दिया कार खरीदने का फैसला

रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक दिन नाना पाटेकर टीवी पर न्यूज देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबर देखी, जिसमें एक पूरा परिवार शोक में नजर आ रहा था। उस समय नाना अगले दिन 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने वाले थे और कार से जुड़ी तैयारियां भी पूरी हो चुकी थीं। रणबीर ने बताया था कि न्यूज देखने के बाद नाना ने तुरंत अपने एक दोस्त को फोन किया। उन्होंने दोस्त से कहा कि 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर किसानों के बीच बांट दिए जाएं। इस घटना को बताते हुए रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर के किसान परिवारों के प्रति जुड़ाव का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि नाना पाटेकर ने NAAM फाउंडेशन की स्थापना की थी और किसानों की परेशानियों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहे। रणबीर के मुताबिक, इसी वजह से उनके गुस्से को सिर्फ उनके स्वभाव से जोड़कर देखना सही नहीं था।
सड़क पर प्लास्टिक की बोतल फेंकने पर भी जताई थी नाराजगी

रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर के गुस्से से जुड़ा एक और किस्सा भी साझा किया था। उन्होंने बताया था कि एक बार नाना ने किसी व्यक्ति को कार से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते हुए देख लिया। नाना ने अपनी कार रोककर उस बोतल को उठाया और फिर उस कार को रुकवाया।

रणबीर के अनुसार, नाना ने कार का शीशा नीचे करवाया और उस व्यक्ति से देश को साफ रखने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया। उन्होंने उससे कहा था कि गांधीजी अब नहीं हैं, लेकिन वह खुद इस धरती पर मौजूद है, इसलिए एक नागरिक के तौर पर देश को स्वच्छ रखना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या वह उसकी गाड़ी में बोतलें फेंक सकता है। इस घटना के जरिए रणबीर पुष्प ने नाना के गुस्से के पीछे उनकी अपनी सोच और सार्वजनिक जिम्मेदारी को लेकर चिंता का उदाहरण दिया था।

75 साल की उम्र में हुआ नाना पाटेकर का निधन

नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका।

1978 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और कई चर्चित फिल्मों में काम किया। अपने लंबे फिल्मी करियर में नाना पाटेकर ने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे। साल 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उन्हें ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके काम के लिए जाना जाता था। नाना पाटेकर के अभिनय करियर के साथ उनके सामाजिक कार्यों का पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा। किसान परिवारों की मदद से जुड़ा 1.5 करोड़ रुपये की कार छोड़ने का यह किस्सा भी इसी पहलू को सामने लाता है।