दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अपने लंबे फिल्मी करियर के साथ-साथ निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। हाल ही में उन्होंने मदरहुड, रिश्तों और आज की पीढ़ी की जिंदगी को लेकर खुलकर बात की। इसी दौरान उन्होंने अपनी बेटी मेघा के लिए भी ऐसी सलाह साझा की, जिसमें उन्होंने शादी को लेकर किसी तरह के सामाजिक दबाव में आने के बजाय अपनी पसंद के मुताबिक जिंदगी जीने की बात कही।
मौसमी चटर्जी की शादी जयंत मुखर्जी से हुई थी, जो दिग्गज सिंगर और कंपोजर हेमंत कुमार के बेटे हैं। मौसमी की दो बेटियां पायल और मेघा थीं। उनकी बड़ी बेटी पायल का 2019 में निधन हो गया था। पायल करीब दो साल तक कोमा में भी रही थीं। बेटी को खोने का यह दर्द मौसमी और उनके परिवार के लिए बेहद मुश्किल रहा है।
बेटियों की परवरिश को लेकर मौसमी ने उठाए सवाल
मौसमी ने अपनी बातचीत में कहा कि समय के साथ समाज में बदलाव आया है और पुरानी सोच से आगे बढ़ना जरूरी है। उनके मुताबिक, अक्सर बेटियों को ससुराल और सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन बेटों को उसी तरह की जिम्मेदारियां निभाने की सीख नहीं दी जाती।
उन्होंने इस सोच पर भी सवाल उठाया कि घर के काम सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी हैं। मौसमी का कहना है कि आज की पीढ़ी काफी तनाव में है और कई लोग अपनी जिंदगी का आनंद लेने के लिए खुद को समय ही नहीं दे पा रहे हैं।
‘दूसरों को साबित करने के लिए चीजें मत करिए’मौसमी ने अपनी बेटी को सलाह देते हुए कहा कि जिंदगी में फैसले दूसरे लोगों को कुछ साबित करने के लिए नहीं लेने चाहिए। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह 78 साल की हो चुकी हैं और उनकी सलाह है कि इंसान को वही करना चाहिए जो उसे पसंद है, लेकिन किसी भी चीज की अति से बचना चाहिए।
उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने खुद अपनी जिंदगी में गलतियां की हैं। हालांकि, उनके मुताबिक गलती से सीखना और उसे दोबारा न दोहराना जरूरी है।
मौसमी ने रिश्तों और शादी को लेकर भी अपनी बेटी को अपनी पसंद के अनुसार जिंदगी जीने की सलाह दी। उनकी बात का सार यही था कि अगर किसी को शादी नहीं करनी है तो सिर्फ सामाजिक दबाव की वजह से शादी करने की जरूरत नहीं है। रिश्ते में रहना हो तो अपनी पसंद से रहें और जीवन का फैसला दूसरों को खुश करने या कुछ साबित करने के लिए न लें।
बेटी पायल को खोने का दर्द आज भी बरकरारपायल के निधन का जिक्र करते हुए मौसमी पहले भी अपने परिवार के उस दर्द के बारे में बात कर चुकी हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उनके पति जयंत मुखर्जी अपनी बेटी की मौत के सदमे से पूरी तरह उबर पाए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह खुद भी उस दुख से उबर नहीं पाई हैं और पायल की कमी हमेशा महसूस होती रहेगी।
मौसमी ने बताया था कि मेघा और पायल के बीच करीब आठ साल का अंतर था और मेघा के लिए पायल मां जैसी थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि कभी-कभी उनके पति रात में उठकर पायल का नाम लेकर चिल्लाते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के दुख को शब्दों में पूरी तरह बयां करना संभव नहीं है।
बाल कलाकार के तौर पर शुरू हुआ था मौसमी का सफरमौसमी चटर्जी ने कम उम्र में ही फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली फिल्मों में भी काम किया। 1967 में वह बंगाली फिल्म ‘बालिका वधू’ में नजर आई थीं। इसके बाद 1969 में ‘परिणीता’ में दिखाई दीं।
साल 1972 में मौसमी ने हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। वह ‘अनुराग’ में शिवानी के किरदार में नजर आई थीं। इसके बाद उनके करियर में ‘नैना’, ‘कच्चे धागे’, ‘जहरीला इंसान’, ‘उस पार’, ‘हमशक्ल’, ‘बेनाम’, ‘बदला’, ‘उमर कैद’, ‘दो झूठ’, ‘अनाड़ी’, ‘हत्यारा’, ‘अब क्या होगा’, ‘तुम्हारी कसम’, ‘स्वर्ग नरक’, ‘एक बाप 6 बेटे’, ‘भोला भाला’, ‘लव इन कनाडा’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘करीब’, ‘मुकद्दर’, ‘ना तुम जानो न हम जाने’, ‘जिंदगी रॉक्स’ और ‘हम कौन हैं?’ जैसी फिल्में शामिल रहीं।
‘द जापानी वाइफ’ के बाद भी फिल्मों में दिखींफिल्मों से कुछ समय का ब्रेक लेने के बाद मौसमी 2010 में अपर्णा सेन की फिल्म ‘द जापानी वाइफ’ में नजर आईं। इस फिल्म की कहानी कुणाल बसु ने लिखी थी। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली, लेकिन इसे समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
इसके बाद मौसमी ‘पिकू’, ‘Sesh Sangbad’ और ‘आरी’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बनीं। उनकी पिछली फिल्म ‘आरी’ 2025 में आई थी, जिसमें उन्होंने जोया सेन का किरदार निभाया था।
फिल्मों के अलावा मौसमी ने टेलीविजन पर भी काम किया है। वह ‘तलाश’ और ‘अलबेली’ जैसे टीवी शोज में नजर आईं। इसके अलावा ‘जीना इसी का नाम है’, ‘सुपर डांसर’, ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ और ‘द कपिल शर्मा शो’ में भी वह गेस्ट के तौर पर दिखाई दी हैं।