कांवड़ यात्रा इन दिनों पूरे उत्साह और भक्ति के साथ जारी है। हर तरफ शिवभक्तों की टोलियां नजर आ रही हैं, जो हरिद्वार समेत अलग-अलग तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर लौट रही हैं। सावन के इस पवित्र अवसर पर भक्त महादेव को जल अर्पित करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। 11 अगस्त को शिवलिंग पर कांवड़ का जल चढ़ाया जाएगा। इससे पहले ही कांवड़ मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों और सड़कों तक भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
कांवड़ यात्रा में भक्ति के साथ संगीत का भी अपना अलग रंग देखने को मिल रहा है। शिवभक्तों की टोलियां रास्ते में डीजे, ढोल और अलग-अलग भजनों के साथ यात्रा का आनंद ले रही हैं। इस दौरान कई धार्मिक और रीमिक्स गाने खूब सुनाई दे रहे हैं, लेकिन एक हरियाणवी भजन ने इस साल खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा है। इसकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी है कि इसे 2026 की कांवड़ यात्रा का देसी एंथम कहना गलत नहीं होगा।
जिस हरियाणवी गाने की इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उसके बोल हैं 'जी लागे से बाब्या में' (Ji Laage Se Babya Mein)। इस गाने को मशहूर हरियाणवी सिंगर राज मावर और अमन जाजी ने अपनी आवाज दी है। सावन और कांवड़ यात्रा के माहौल में यह भजन भक्तों की पसंद बन चुका है। यात्रा पर निकलने वाली कई टोलियों में यह गाना लगातार सुनाई दे रहा है और इसकी धुन लोगों को झूमने पर मजबूर कर रही है।
अगर इसकी डिजिटल लोकप्रियता की बात करें तो YouTube पर इस गाने को अब तक 157 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। खास बात यह है कि यह गाना साल 2025 में रिलीज हुआ था, लेकिन कांवड़ यात्रा और सावन के मौके पर एक बार फिर इसकी लोकप्रियता जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है। धार्मिक भावनाओं और हरियाणवी देसी अंदाज के मेल ने इसे इस समय लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट में शामिल कर दिया है।
कौन हैं राज मावर?राज मावर हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। वह सिंगर होने के साथ-साथ गीतकार, म्यूजिक कंपोजर और अभिनेता के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनका जन्म 13 अप्रैल 1994 को हरियाणा के सिरसा में हुआ था। अपने खास अंदाज, दमदार आवाज और एनर्जेटिक हरियाणवी गानों की वजह से उन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है।
राज मावर का संगीत सफर काफी पहले शुरू हो गया था। उन्होंने करीब 2010-2011 के आसपास हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके गाने लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगे और वह हरियाणवी म्यूजिक के चर्चित चेहरों में शामिल हो गए।
राज मावर के करियर में भगवान शिव से जुड़ा एक गाना भी अहम मोड़ लेकर आया था। उनका भजन 'मैं तेरी नचाई नाचूं सूं' दर्शकों के बीच काफी पसंद किया गया और इस गाने ने उनकी लोकप्रियता को नई दिशा देने का काम किया। इसके बाद उनके कई गाने लगातार चर्चा में रहे और उन्होंने हरियाणवी म्यूजिक में अपनी पकड़ मजबूत की।
राज मावर के लोकप्रिय गानों की बात करें तो 'मटक चालूंगी' ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा 'स्कॉर्पियो' और 'चेतक' जैसे गाने भी उनकी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई गानों ने सोशल मीडिया और डांस प्लेलिस्ट में भी अपनी जगह बनाई है।
हरियाणवी बीट्स में मॉडर्न म्यूजिक का तड़काराज मावर के गानों को खास बनाने वाली एक बड़ी वजह उनका म्यूजिक स्टाइल भी माना जाता है। वह पारंपरिक हरियाणवी धुनों और देसी बीट्स को मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के साथ इस तरह मिलाते हैं कि गाने में लोकल फ्लेवर भी बना रहता है और युवाओं को पसंद आने वाला नया अंदाज भी नजर आता है।
यही फ्यूजन उनके गानों को आम हरियाणवी गीतों से अलग पहचान देता है। उनकी आवाज और तेज बीट्स वाले गाने खासतौर पर डीजे, शादी-पार्टियों और डांस प्लेलिस्ट में खूब बजाए जाते हैं। यही वजह है कि राज मावर के गानों की लोकप्रियता सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे राज्यों में भी उनके गानों को काफी पसंद किया जाता है।
फिलहाल कांवड़ यात्रा के दौरान 'जी लागे से बाब्या में' की बढ़ती लोकप्रियता ने राज मावर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सावन के इस पवित्र महीने में जहां भक्त महादेव की भक्ति में डूबे हुए हैं, वहीं हरियाणवी अंदाज में बना यह गीत यात्रा के उत्साह को और बढ़ा रहा है। सड़कों पर कांवड़ियों की टोलियों के बीच गूंजता यह गाना इस समय सावन और कांवड़ यात्रा के माहौल का खास हिस्सा बन चुका है।