20 साल से सेट पर आईना नहीं देखतीं दीया मिर्जा, वजह जानकर होगी हैरानी

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने अपने करियर से जुड़ी ऐसी आदत के बारे में बताया है, जो आमतौर पर फिल्म सेट पर देखने को नहीं मिलती। दीया के मुताबिक, वह पिछले करीब 20 वर्षों से शूटिंग के दौरान आईने में अपना लुक नहीं देखतीं। इतना ही नहीं, वह शॉट देने के बाद मॉनिटर पर भी खुद को देखने से बचती हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें अपने अभिनय और उस पल की भावनाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

दीया ने टाइम्स नाउ से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने जानबूझकर यह तरीका अपनाया है। उनके अनुसार, शूटिंग के दौरान खुद के लुक पर नजर रखने के बजाय वह किरदार और सीन की गहराई को प्राथमिकता देती हैं।

करियर की शुरुआत में ही समझ आया क्या करना है

दीया के मुताबिक, अभिनय करियर के शुरुआती दौर में ही उन्हें महसूस हो गया था कि अपने चेहरे और लुक्स पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना उनकी परफॉर्मेंस के लिए सही नहीं है। इसी वजह से उन्होंने धीरे-धीरे शूटिंग के दौरान आईना देखने और मॉनिटर पर अपना शॉट जांचने की आदत छोड़ दी।

उनका फोकस इस बात पर रहता है कि वह सीन के उस खास पल को कितनी गहराई से महसूस कर पा रही हैं। दीया का मानना है कि कलाकार के लिए अपने लुक को लगातार जांचते रहने के बजाय अभिनय की गुणवत्ता पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

बाल, मेकअप और कॉस्ट्यूम को लेकर रहती हैं सजग

हालांकि दीया अपने लुक को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करतीं। वह बताती हैं कि किसी किरदार के लिए कपड़ों का चुनाव उनके लिए अहम होता है। वह यह जानने में दिलचस्पी रखती हैं कि उनके आउटफिट पर किस आर्टिस्ट ने काम किया है, कपड़े का फैब्रिक और टेक्सटाइल क्या है और उसमें किस तरह के डाई का इस्तेमाल किया गया है।

उनके अनुसार, फिल्म में किसी किरदार की विजुअल पहचान तैयार करने में हेयर, मेकअप और कॉस्ट्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए वह इन पहलुओं को समझने और किरदार के अनुरूप रखने पर ध्यान देती हैं। लेकिन एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद वह अपने लुक को बार-बार जांचने में समय नहीं लगातीं।
'वैनिटी की कीमत पीस ऑफ माइंड है'

दीया ने यह भी कहा कि अपनी अपीयरेंस को लेकर जरूरत से ज्यादा सजग रहने का असर मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, वैनिटी के साथ एक कीमत जुड़ी होती है और वह कीमत मानसिक शांति है। वह अपनी मानसिक ऊर्जा को लगातार इस बात पर खर्च नहीं करना चाहतीं कि कैमरे पर वह कैसी दिख रही हैं।

उनका यह तरीका फिल्म सेट पर उनके काम करने की अलग सोच को दिखाता है, जहां वह बाहरी रूप के बजाय किरदार के अनुभव और परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देती हैं।

युवा लड़कियों के लिए दीया का खास संदेश

दीया ने अपनी बात को युवा लड़कियों से जुड़े एक बड़े मुद्दे से भी जोड़ा। उनका कहना है कि लड़कियों पर कॉस्मेटिक एन्हांसमेंट को लेकर दबाव बनाया जाता है और उन्हें बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे पर्याप्त खूबसूरत नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर किसी लड़की की तुलना दूसरी लड़कियों से की जाती है और उसे यह बताया जाता है कि उससे ज्यादा खूबसूरत कोई और है। दीया चाहती हैं कि उनके अपने अनुभव और सोच से युवा लड़कियों को प्रेरणा मिले और वे अपनी अपीयरेंस के साथ एक स्वस्थ रिश्ता बना सकें।