CINTAA से 11 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों पर लगे गंभीर आरोप, उपासना सिंह ने बताया पूरा मामला

सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन में सामूहिक इस्तीफों से मचा हड़कंप, पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों पर सदस्यों ने लगाए पद के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी के आरोप

सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) के भीतर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। संगठन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 11 सदस्यों के इस्तीफे के बाद संस्था के कामकाज और मौजूदा नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया, आपसी सलाह-मशविरा और संवैधानिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। साथ ही उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी रखी है।

CINTAA की जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह ने ANI से बातचीत में इन इस्तीफों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस्तीफा देने वाले 11 सदस्यों में से आठ ऐसे लोग हैं, जिन्हें एग्जीक्यूटिव कमेटी के लिए चुनाव के जरिए चुना गया था। इस घटनाक्रम पर उपासना सिंह ने दुख जताते हुए कहा कि इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने अपनी शिकायतों को भी सामने रखा है।

11 सदस्यों ने सौंपे इस्तीफे

उपासना सिंह के मुताबिक, जिन आठ निर्वाचित सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, उनमें हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर शामिल हैं। उनके अनुसार, सदस्यों ने केवल अपने पदों से हटने का फैसला नहीं किया, बल्कि इसके साथ एक शिकायत पत्र भी सौंपा, जिसमें संगठन के कामकाज को लेकर कई मुद्दे उठाए गए हैं।

सदस्यों की ओर से दिए गए संयुक्त इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया गया कि CINTAA में सामूहिक निर्णय लेने और सभी संबंधित सदस्यों से सलाह करने की प्रक्रिया का लगातार पालन नहीं किया जा रहा था। उनका दावा है कि संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और गतिविधियों का दायरा धीरे-धीरे कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों और एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों तक सीमित होता चला गया।
फैसलों को लेकर भी उठाए गए सवाल

इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने अपने आरोपों में पूनम ढिल्लों की कार्यशैली का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक, कुछ महत्वपूर्ण निर्णय एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों से पर्याप्त चर्चा या अनुमति लिए बिना लिए गए।

शिकायत में सरकारी अधिकारियों के साथ आधिकारिक संवाद के लिए निजी ईमेल आईडी के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया है। इसके अलावा इंडस्ट्री से जुड़ी संस्थाओं के साथ CINTAA की आधिकारिक ईमेल आईडी के जरिए बातचीत करने से जुड़े फैसलों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

सदस्यों का आरोप है कि संगठन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी सदस्यों को समान रूप से शामिल नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में विश्वास की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।

पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों पर लगाए आरोप

उपासना सिंह ने बातचीत के दौरान पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों को लेकर सदस्यों की शिकायतों के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने आरोप लगाया है कि दोनों पदाधिकारी अपने पदों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर रही थीं।

उपासना सिंह ने यह भी कहा कि सदस्यों की बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने की शिकायत सामने आई है। इसके अलावा, कुछ मामलों में बिना उचित विचार-विमर्श के शो-कॉज नोटिस जारी करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

सदस्यों की भूमिकाओं में बदलाव और अभिनेताओं की सदस्यता से जुड़े फैसलों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। शिकायत के मुताबिक, कुछ सदस्यों की जिम्मेदारियों में बिना पर्याप्त सलाह-मशविरा किए बदलाव किए गए। वहीं, कुछ कलाकारों के सदस्यता कार्ड कथित तौर पर बिना पूर्व चेतावनी के रद्द किए जाने का भी दावा किया गया है।

उपासना सिंह ने यह भी बताया कि कुछ सदस्यों ने इससे पहले भी इस्तीफा देने की कोशिश की थी, लेकिन उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए थे।

निजी ईमेल के इस्तेमाल पर उपासना सिंह ने जताई आपत्ति

CINTAA के आधिकारिक कामकाज में निजी ईमेल अकाउंट के इस्तेमाल को लेकर भी उपासना सिंह ने चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि किसी संगठन के आधिकारिक संवाद के लिए संस्था की आधिकारिक ईमेल व्यवस्था का इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि बातचीत का उचित रिकॉर्ड बना रहे और प्रक्रिया में पारदर्शिता कायम रहे।

उन्होंने कहा कि जब CINTAA की ओर से किसी दूसरे संगठन या संस्था के साथ आधिकारिक संवाद किया जाता है, तो इसके लिए निजी ईमेल आईडी का इस्तेमाल उचित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, निजी ईमेल के जरिए बातचीत होने से आधिकारिक रिकॉर्ड और पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं।

क्या CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी भंग हुई?

सामूहिक इस्तीफों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी अब भंग मानी जाएगी। हालांकि, संगठन की ओर से पेश वकील सुविज्ञ विद्यार्थी ने इस बात को खारिज किया है।

उनका कहना है कि एग्जीक्यूटिव कमेटी के भंग होने की बात गलतफहमी पर आधारित है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने संगठन के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि EC तभी भंग होगी, जब निर्वाचित सदस्यों में से 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य इस्तीफा दें।

वकील के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में यह शर्त पूरी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, उनकी जगह चुनाव में अगले सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले सदस्यों को शामिल किया गया है।

नए चुनाव कराने की मांग

वहीं, उपासना सिंह की ओर से इस मामले में संविधान की अलग व्याख्या सामने रखी गई है। उनका कहना है कि CINTAA के संविधान में यह प्रावधान है कि यदि आधे या उससे अधिक सदस्य इस्तीफा दे देते हैं, तो एग्जीक्यूटिव कमेटी भंग हो सकती है।

इस्तीफा देने वाले सदस्य अब चाहते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी रजिस्ट्रार की ओर से की जाए। उनका कहना है कि संगठन में आगे की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो और नए चुनाव उचित नियमों के तहत कराए जाएं।

फिलहाल, 11 सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे के बाद CINTAA के भीतर उठे विवाद ने संगठन के कामकाज और नेतृत्व को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ इस्तीफा देने वाले सदस्य निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं संगठन की ओर से एग्जीक्यूटिव कमेटी के भंग होने की बात को कानूनी आधारहीन बताया गया है। अब इस विवाद में आगे की प्रक्रिया और संगठन के स्तर पर होने वाले फैसलों पर सभी की नजर बनी हुई है।