सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई है और अब दूसरे सप्ताह में फिल्म के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। फिल्म की कम कमाई के बीच इसके वितरक सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में कम से कम एक शो जारी रखने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, ‘आवारापन 2’ की मजबूत कमाई और दर्शकों की मांग के चलते सिंगल स्क्रीन थिएटर संचालक उसके अधिक से अधिक शो चलाना चाहते हैं। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच दूसरे सप्ताह में भी स्क्रीन शेयरिंग को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। 26 अगस्त को ‘टॉक्सिक’ की रिलीज होने वाली है और इस फिल्म को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा है। ऐसे में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के सामने आने वाले दिनों में तीन फिल्मों के शो के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
‘बंटवारा 1947’ के वितरक चाहते हैं कम से कम एक शोरिपोर्ट के मुताबिक ‘बंटवारा 1947’ के वितरक पीवीआर आईनॉक्स पिक्चर्स ने कई सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से 21 अगस्त से फिल्म का कम से कम एक शो चलाने को कहा है। हालांकि, थिएटर संचालक इस मांग को लेकर असमंजस में हैं।
इसका कारण फिल्म का मौजूदा बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन है। ‘बंटवारा 1947’ ने खासकर सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में उम्मीद के अनुरूप कारोबार नहीं किया है। इसके विपरीत ‘आवारापन 2’ लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है और कई सिंगल स्क्रीन थिएटरों में दर्शकों की मांग अभी भी बनी हुई है।
थिएटर संचालकों की प्राथमिकता स्वाभाविक रूप से उस फिल्म को अधिक शो देना है जिसके टिकट अधिक बिक रहे हैं। लेकिन यदि ‘बंटवारा 1947’ के वितरक एक शो अनिवार्य रूप से देने की मांग करते हैं, तो सिनेमाघरों को ‘आवारापन 2’ के कुछ शो कम करने पड़ सकते हैं।
यही स्थिति दूसरे सप्ताह की स्क्रीन शेयरिंग को लेकर विवाद का कारण बन रही है।
‘आवारापन 2’ के वितरक की भी अपनी शर्तदूसरी तरफ ‘आवारापन 2’ के वितरक भी सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में अपनी फिल्म के लिए सभी शो चाहते हैं। थिएटर संचालकों को इस मांग से मूल रूप से परेशानी नहीं है, क्योंकि फिल्म के लिए दर्शकों की मांग मजबूत बनी हुई है।
समस्या दूसरी शर्त को लेकर पैदा हुई है। ‘आवारापन 2’ के वितरक चाहते हैं कि 27 अगस्त तक, यानी अगले गुरुवार तक, सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में उनकी फिल्म के सभी शो चलते रहें।
लेकिन इस योजना के बीच 26 अगस्त को ‘टॉक्सिक’ रिलीज हो रही है। यश की इस फिल्म को लेकर पहले से ही काफी चर्चा है और इसके कारण सिनेमाघरों को उसे भी पर्याप्त स्क्रीन और शो देने होंगे।
ऐसे में थिएटर संचालकों के सामने एक कठिन स्थिति है। एक तरफ ‘आवारापन 2’ की मजबूत मांग है, दूसरी तरफ ‘बंटवारा 1947’ के वितरक शो बनाए रखना चाहते हैं और तीसरी तरफ ‘टॉक्सिक’ जैसी बड़ी फिल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंचने वाली है।
‘बंटवारा 1947’ की कमजोर कमाई ने बढ़ाई मुश्किल‘बंटवारा 1947’ के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूसरे सप्ताह में स्क्रीन हासिल करने की स्थिति सामान्यतः पहले सप्ताह के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से तय होती है। जिस फिल्म की कमाई मजबूत रहती है, थिएटर संचालक उसके शो बढ़ाने में रुचि दिखाते हैं। वहीं कमजोर प्रदर्शन करने वाली फिल्मों के शो कम होते जाते हैं।
सनी देओल की इस फिल्म के मामले में स्थिति उलटी दिखाई दे रही है। फिल्म को स्वतंत्रता दिवस की रिलीज का लाभ मिला और दूसरे दिन इसकी कमाई में अच्छी बढ़ोतरी भी हुई, लेकिन इसके बाद कारोबार में लगातार गिरावट आई।
यही कारण है कि सिंगल स्क्रीन थिएटरों में फिल्म की मांग कम होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में वितरक की ओर से एक शो जारी रखने की मांग थिएटर संचालकों के लिए व्यावसायिक रूप से आसान फैसला नहीं है।
‘आवारापन 2’ ने बना ली मजबूत पकड़वहीं ‘आवारापन 2’ ने रिलीज के बाद से ही बॉक्स ऑफिस पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। फिल्म को खास तौर पर सिंगल स्क्रीन दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।
इसका सीधा फायदा थिएटरों को भी मिल रहा है। जिस फिल्म के शो में दर्शक लगातार पहुंच रहे हों, उसे हटाकर कमजोर प्रदर्शन करने वाली फिल्म को स्क्रीन देना सिनेमाघर संचालकों के लिए आर्थिक रूप से नुकसान का सौदा हो सकता है।
यही वजह है कि ‘आवारापन 2’ को लेकर थिएटर संचालकों और वितरकों के बीच मांग और शो की संख्या को लेकर बातचीत का रुख अलग है, जबकि ‘बंटवारा 1947’ के मामले में वितरक फिल्म की मौजूदगी बनाए रखने के लिए शो चाहते हैं।
अब ‘टॉक्सिक’ ने बढ़ाई परेशानीइस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 26 अगस्त को आने वाला है। इस दिन यश की ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
‘टॉक्सिक’ को लेकर पहले से ही बड़ा उत्साह है और सिंगल स्क्रीन के साथ-साथ मल्टीप्लेक्स में भी इसे पर्याप्त स्क्रीन और शो देने की जरूरत होगी। ऐसे में 27 अगस्त तक ‘आवारापन 2’ के सभी शो बनाए रखने की मांग व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकती है।
यदि थिएटरों में ‘आवारापन 2’ के सभी शो जारी रहते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ को पर्याप्त स्क्रीन देना चुनौती बन सकता है। यदि ‘टॉक्सिक’ के लिए बड़ी संख्या में शो बढ़ाए जाते हैं, तो ‘आवारापन 2’ के शो प्रभावित होंगे। वहीं ‘बंटवारा 1947’ को एक शो देने की मांग तीसरी फिल्म के लिए उपलब्ध स्क्रीन को और सीमित कर सकती है।
इसलिए आने वाले कुछ दिन सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
क्या ‘बंटवारा 1947’ को मिलेगा दूसरा मौका?स्क्रीन शेयरिंग का यह विवाद ‘बंटवारा 1947’ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरे सप्ताहांत में फिल्म को अपनी कमाई में सुधार की जरूरत है।
अगर फिल्म को पर्याप्त शो नहीं मिलते हैं, तो उसके पास बॉक्स ऑफिस पर वापसी करने का अवसर और कम हो जाएगा। लेकिन अगर वितरक कुछ सिंगल स्क्रीन में शो बनाए रखने में सफल होते हैं और दर्शकों की संख्या बढ़ती है, तो फिल्म अपनी थिएटर रन को थोड़ा लंबा कर सकती है।
हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में इसके लिए मजबूत दर्शक मांग पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती है।
बॉक्स ऑफिस की लड़ाई अब स्क्रीन की लड़ाई बनी‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ के बीच स्क्रीन शेयरिंग की समस्या यह दिखाती है कि फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता केवल टिकट बिक्री तक सीमित नहीं रहती। एक फिल्म की सफलता सीधे तौर पर यह भी तय करती है कि उसे आने वाले दिनों में कितने शो और कितनी स्क्रीन मिलेंगी।
‘आवारापन 2’ के मामले में मजबूत दर्शक मांग उसे अधिक शो दिलाने में मदद कर रही है, जबकि ‘बंटवारा 1947’ को अपने कमजोर प्रदर्शन के बावजूद स्क्रीन बनाए रखने के लिए वितरक स्तर पर प्रयास करना पड़ रहा है।
‘टॉक्सिक’ की एंट्री के बाद दिलचस्प हो जाएगा यह मुकाबला
सिंगल
स्क्रीन थिएटर संचालक फिलहाल दोनों फिल्मों के वितरकों के साथ बातचीत कर
रहे हैं ताकि ऐसा रास्ता निकाला जा सके जिसमें ‘आवारापन 2’ की मौजूदा मांग
को पूरा किया जा सके, ‘बंटवारा 1947’ को भी कुछ शो मिलें और ‘टॉक्सिक’ को
रिलीज के समय पर्याप्त स्क्रीन उपलब्ध कराई जा सकें।
आखिरकार फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि थिएटरों के लिए कौन-सी फिल्म कितने दर्शक और कितना कारोबार लेकर आती है।
‘बंटवारा
1947’ के लिए यह सिर्फ दूसरे सप्ताह की स्क्रीन का सवाल नहीं है। यह फिल्म
के बॉक्स ऑफिस सफर को बचाने की आखिरी कोशिशों में से एक भी हो सकती है।
अगर फिल्म के शो लगातार घटते गए, तो उसका थिएटर रन जल्दी सिमट सकता है।
वहीं दूसरे सप्ताहांत में दर्शकों की संख्या में अपेक्षित सुधार आता है तो
फिल्म कुछ हद तक अपनी स्थिति संभालने की कोशिश कर सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि ‘बंटवारा 1947’ की लड़ाई अब केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की नहीं, बल्कि स्क्रीन और शो बचाने की भी बन गई है।