भारतीय सिनेमा को हर कोने तक पहुँचाने के उद्देश्य से आमिर खान की हालिया फिल्म सितारे ज़मीन पर ने एक अनोखा मुकाम हासिल किया है। यह फिल्म अब विश्व के सबसे ऊंचाई पर स्थित थिएटर — लद्दाख के 11,562 फीट की ऊंचाई पर बने Picturetime मोबाइल थिएटर में दिखाई गई। खास बात यह रही कि इस विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए किया गया, जिसने सिनेमा की शक्ति को मानवीय संवेदना के साथ जोड़ा।
लद्दाख की पहाड़ियों में गूंजा बच्चों की हँसी का सिनेमाPicturetime की इस मोबाइल डिजिटल सिनेमा पहल के अंतर्गत लद्दाख में हुई इस स्क्रीनिंग में डॉ. डाइचिन की Hopeful Steps Clinic के सहयोग से सात विशेष बच्चे, उनके 18 माता-पिता और चार स्टाफ सदस्य शामिल हुए। आमिर खान और बच्चों की कहानी पर आधारित यह फिल्म इन खास बच्चों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ एक भावनात्मक अनुभव भी बनी।
बच्चों ने फिल्म का भरपूर आनंद उठाया, और माता-पिता की आँखों में भावनाओं की चमक थी। लद्दाख जैसे इलाके में, जहाँ बड़े पर्दे का अनुभव मिलना दुर्लभ है, वहाँ यह आयोजन एक बड़ी उपलब्धि बन गया।
आमिर खान के विज़न का परिणाम: हर भारतीय तक पहुँचे सिनेमाPicturetime के संस्थापक और सीईओ सुशील चौधरी ने कहा, आमिर खान ने Waves Summit के दौरान सिनेमा की गहरी भावनात्मक ताकत और इसकी सभी भारतीयों तक पहुँचने की आवश्यकता पर बल दिया था। सितारे ज़मीन पर की स्क्रीनिंग इस सोच को साकार करने की दिशा में एक कदम है।
उन्होंने आगे जोड़ा, हम डॉ. डाइचिन और Hopeful Steps Clinic के सहयोग के लिए आभारी हैं। बच्चों को उनकी जरूरतों के अनुरूप बनाए गए एक सुरक्षित स्पेस में सिनेमा का जादू महसूस करते देखना, हमारे मिशन का सबसे सार्थक रूप है।
फिल्म की कहानी और सफलतासितारे ज़मीन पर एक निलंबित बास्केटबॉल कोच (आमिर खान) की कहानी है, जिसे दिव्यांग खिलाड़ियों की एक टीम को टूर्नामेंट के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यह फिल्म 2007 की तारे ज़मीन पर की आध्यात्मिक अगली कड़ी मानी जा रही है, और इसे इस वर्ष की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है।
फिल्म में आमिर के साथ जेनेलिया डिसूजा भी नजर आईं, और 10 नए कलाकारों ने भी अभिनय में कदम रखा जिनमें आरुष दत्ता, गोपी कृष्ण वर्मा, सम्वित देसाई, वेदांत शर्मा, आयुष भंसाली, आशीष पेंडसे, ऋषि शाहानी, ऋषभ जैन, नमन मिश्रा और सिमरन मंगेशकर शामिल हैं।
लद्दाख में आयोजित यह विशेष स्क्रीनिंग न केवल फिल्म सितारे ज़मीन पर की पहुंच का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सिनेमा कैसे संवेदनशील समूहों के लिए सशक्तिकरण और जुड़ाव का माध्यम बन सकता है। आमिर खान की यह पहल दर्शकों के दिलों में गूंज बनकर रह जाएगी, खासकर उन बच्चों के लिए जिनके जीवन में ऐसे अनुभव दुर्लभ होते हैं।