मुल्तानी मिट्टी लगाने से पहले पहचानें अपना स्किन टाइप, गलत इस्तेमाल से हो सकती है ड्राईनेस और जलन

मुल्तानी मिट्टी यानी फुलर्स अर्थ लंबे समय से भारतीय स्किनकेयर रूटीन का हिस्सा रही है। यह खास तौर पर अपनी ऑयल सोखने वाली क्षमता के लिए जानी जाती है, इसलिए तैलीय और एक्ने-प्रोन त्वचा वाले लोग इसे फेस पैक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हर स्किन टाइप पर इसे एक ही तरीके से लगाना सही नहीं है। हालिया त्वचा विशेषज्ञ मार्गदर्शन में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि मुल्तानी मिट्टी का ज्यादा या गलत इस्तेमाल त्वचा से प्राकृतिक तेल कम कर सकता है और ड्राईनेस या जलन बढ़ा सकता है।

ऑयली स्किन के लिए मुल्तानी मिट्टी

अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली है और चेहरे पर बार-बार अतिरिक्त तेल दिखाई देता है, तो मुल्तानी मिट्टी आपके लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकती है। इसकी absorbent प्रकृति त्वचा के अतिरिक्त सीबम को सोखने में मदद करती है।

ऑयली स्किन के लिए एक से दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में जरूरत के अनुसार पानी या गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर पतली परत में लगाएं और पूरी तरह सूखने या त्वचा पर बहुत ज्यादा खिंचाव महसूस होने से पहले धो लें।

इसे रोजाना लगाने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर सप्ताह में एक बार से शुरुआत करना बेहतर है। त्वचा अच्छी तरह सहन करे तो कुछ ऑयली स्किन वालों में सप्ताह में दो बार तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

कॉम्बिनेशन स्किन के लिए

कॉम्बिनेशन स्किन में चेहरे का कुछ हिस्सा ऑयली और कुछ हिस्सा ड्राई रहता है। ऐसे में पूरे चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी की मोटी परत लगाने के बजाय इसे मुख्य रूप से ऑयली हिस्सों, खासकर टी-जोन यानी माथे, नाक और ठुड्डी पर लगाना ज्यादा उचित है।

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार कॉम्बिनेशन स्किन में सूखे हिस्सों पर मुल्तानी मिट्टी लगाने से अनावश्यक ड्राईनेस हो सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार केवल ऑयली हिस्से को टारगेट करना बेहतर तरीका है।
ड्राई स्किन पर कैसे इस्तेमाल करें?

ड्राई स्किन वालों को मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करते समय सबसे ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए। इसकी तेल सोखने वाली क्षमता पहले से रूखी त्वचा को और ज्यादा खिंची हुई या सूखी महसूस करा सकती है। लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल करने से फ्लेकिंग और जलन की समस्या भी बढ़ सकती है।

अगर फिर भी इसका इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो इसे केवल थोड़ी मात्रा में किसी हाइड्रेटिंग बेस के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें। लेकिन अगर लगाने के बाद त्वचा में खिंचाव, जलन या पपड़ी जैसी समस्या होती है, तो इसे बंद कर दें।

ड्राई या बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए नियमित मुल्तानी मिट्टी फेस पैक की बजाय ऐसा स्किनकेयर रूटीन अधिक उपयुक्त हो सकता है जिसमें त्वचा की नमी और बैरियर को बनाए रखने पर ध्यान दिया जाए।

सेंसिटिव स्किन के लिए जरूरी सावधानी

सेंसिटिव स्किन पर मुल्तानी मिट्टी हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। त्वचा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसकी absorbent प्रकृति संवेदनशील त्वचा में रूखापन, लालिमा और जलन बढ़ा सकती है। एक्जिमा या रोजेशिया जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं वाले लोगों में भी सावधानी जरूरी है।

इसलिए सेंसिटिव स्किन पर इसे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करें। किसी तरह की जलन, लालिमा या खुजली दिखाई दे तो इस्तेमाल न करें।

नॉर्मल स्किन वालों के लिए

नॉर्मल स्किन पर भी मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन इसे रोजाना लगाने की आवश्यकता नहीं है। एक सामान्य तरीका है कि थोड़ी मात्रा में मुल्तानी मिट्टी को पानी या गुलाब जल के साथ मिलाकर पतला पेस्ट तैयार किया जाए।

फेस पैक को लंबे समय तक चेहरे पर छोड़ने के बजाय कुछ मिनट बाद धो लें और उसके बाद मॉइस्चराइजर लगाएं। मुल्तानी मिट्टी को त्वचा पर पूरी तरह सूखकर फटने तक छोड़ना जरूरी नहीं है।

मुंहासों वाली त्वचा में रखें ये बात

मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल को कम करने में मदद कर सकती है, इसलिए ऑयली और एक्ने-प्रोन त्वचा में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे मुंहासों का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। खासकर गहरे या लगातार बने रहने वाले एक्ने के लिए केवल घरेलू फेस पैक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

यदि आप पहले से एक्ने की ऐसी दवाएं इस्तेमाल कर रहे हैं जिनसे त्वचा सूखती है, तो मुल्तानी मिट्टी लगाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

मुल्तानी मिट्टी लगाते समय इन गलतियों से बचें

सबसे बड़ी गलती इसे रोजाना इस्तेमाल करना या चेहरे पर तब तक लगाए रखना है जब तक यह पूरी तरह सूखकर त्वचा को खींचने न लगे। इससे त्वचा में अनावश्यक रूखापन और जलन हो सकती है।

फेस पैक लगाने से पहले त्वचा साफ करें, आंखों और होंठों के आसपास का हिस्सा छोड़ दें और धोते समय त्वचा को जोर से रगड़ें नहीं। फेस पैक हटाने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना भी जरूरी है।

मुल्तानी मिट्टी से चेहरे को अस्थायी रूप से साफ, कम ऑयली और फ्रेश महसूस कराया जा सकता है, लेकिन इससे त्वचा का प्राकृतिक रंग बदलने या स्थायी रूप से गोरा होने की गारंटी नहीं है।