सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शिवलिंग पर जल अर्पित करने और अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक करने से नवग्रहों से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। ज्योतिष में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि सावन में लगातार 11 दिनों तक ग्रह के अनुसार विशेष सामग्री मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक करने से संबंधित ग्रह को शांत करने में मदद मिल सकती है।
सूर्य दोष के लिए लाल चंदनज्योतिषीय मान्यता में सूर्य को आत्मविश्वास, ऊर्जा, प्रतिष्ठा और जीवन शक्ति का कारक माना गया है। सूर्य से संबंधित दोष होने पर जल में लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ सूर्य को भी उसी जल से अर्घ्य देने की बात कही गई है। मान्यता है कि इससे आत्मबल बढ़ाने और सूर्य से जुड़े अशुभ प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
चंद्र दोष के लिए अक्षतचंद्रमा का संबंध मन, भावनाओं और मानसिक शांति से माना जाता है। चंद्र दोष के लिए जल में साबुत चावल यानी अक्षत मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने का उपाय बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे मन की बेचैनी और भावनात्मक अस्थिरता को शांत करने में सहायता मिल सकती है।
मंगल दोष में गुड़ और लाल चंदनमंगल को साहस, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मंगल से संबंधित दोष के लिए मिट्टी के कलश में गुड़ और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है। इस उपाय को साहस बढ़ाने, विवादों से बचाव और जीवन में स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है।
बुध के लिए दूर्वा
बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी और संचार का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में बुध कमजोर माना जाए, तो जल में दूर्वा का रस मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने का उपाय बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पढ़ाई, वाणी और व्यापार से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलने की उम्मीद की जाती है।
गुरु दोष में हल्दी और गेंदे का फूलगुरु को ज्ञान, शिक्षा, धर्म और समृद्धि से संबंधित ग्रह माना जाता है। गुरु दोष के लिए जल में हल्दी और गेंदे के फूल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है। इसके अलावा केले के पेड़ की जड़ में भी यह जल चढ़ाने की बात कही गई है। इसे शिक्षा, संतान और आर्थिक मामलों में सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।
शुक्र के लिए शक्कर वाला जलशुक्र ग्रह का संबंध सुख-सुविधाओं, सौंदर्य और वैवाहिक जीवन से माना जाता है। शुक्र को मजबूत करने के लिए जल में शक्कर घोलकर शिवलिंग पर चढ़ाने का धार्मिक उपाय बताया गया है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में सामंजस्य, सुख-सुविधाओं और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है।
शनि दोष में काले तिल और शक्कर
शनि को कर्म और अनुशासन का ग्रह माना जाता है। शनि से जुड़े दोष के लिए जल में शक्कर और काले तिल मिलाने का उपाय बताया गया है। इस जल को पहले पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने और फिर इसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करने की मान्यता है। इसे जीवन में आने वाली देरी, बाधाओं और कठिनाइयों से राहत से जोड़कर देखा जाता है।
राहु के लिए काली उड़दराहु को ज्योतिष में छाया ग्रह माना जाता है। राहु दोष के लिए जल में काली उड़द मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने का उपाय बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह अचानक आने वाली परेशानियों, भ्रम और अज्ञात भय से जुड़े प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है।
केतु दोष में सप्तधान्यकेतु को भी छाया ग्रह माना जाता है। इसके लिए जल में सप्तधान्य मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने का उपाय बताया गया है। मान्यता के अनुसार, इससे एकाग्रता की कमी, आध्यात्मिक बेचैनी और अचानक होने वाले नुकसान से जुड़े प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।
11 दिनों तक उपाय करने की मान्यताधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान इन उपायों को लगातार 11 दिनों तक करने पर संबंधित ग्रह के अशुभ प्रभाव को शांत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये उपाय ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार नहीं माना जाता। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार भगवान शिव की पूजा और अभिषेक कर सकते हैं।
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