पहली बार रख रही हैं मंगला गौरी व्रत? इन नियमों का रखें विशेष ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पवित्र मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को माता गौरी की पूजा का विशेष महत्व होता है और इसी दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त यानी आज मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्रदान करता है। वहीं अविवाहित कन्याएं यदि पूरे मन से यह व्रत करती हैं तो उन्हें योग्य और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की मान्यता है। यदि आप इस वर्ष पहली बार मंगला गौरी व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा के नियमों और सावधानियों को पहले से जान लेना बेहद जरूरी है।

मंगला गौरी व्रत के महत्वपूर्ण नियम

मंगला गौरी व्रत के दिन लाल, हरा, पीला या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाओं को यथासंभव सोलह श्रृंगार करके माता गौरी की पूजा करनी चाहिए।

धार्मिक परंपरा के अनुसार यह व्रत लगातार पांच वर्षों तक किया जाता है।

पांचवें वर्ष सावन के अंतिम मंगलवार को विधिपूर्वक मंगला गौरी व्रत का उद्यापन किया जाता है।

उद्यापन के बिना इस व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए निर्धारित समय पर इसका समापन विधान अवश्य करें।

मंगला गौरी पूजा में 16 अंक का विशेष महत्व बताया गया है। माता को चढ़ाई जाने वाली सामग्री जैसे 16 चूड़ियां, 16 बिंदियां, 16 लौंग, 16 इलायची आदि सोलह-सोलह की संख्या में अर्पित करना शुभ माना जाता है।

पूजा के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण या पाठ अवश्य करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत में इन गलतियों से बचें

व्रत के दिन सफेद, काला, नीला और भूरा रंग पहनने से बचना चाहिए। शुभ रंगों के वस्त्र धारण करना अधिक मंगलकारी माना जाता है।

यदि आप मंगला गौरी व्रत कर रही हैं तो इस दिन घर में लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न बनाएं और न ही उसका सेवन करें।

व्रत के दौरान क्रोध, कटु वचन और किसी भी बड़े-बुजुर्ग का अपमान करने से बचें। पूजा के दिन शांत और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना चाहिए।

इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। व्रती को फलाहार या सात्विक आहार का ही सेवन करना उचित माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत में नमक का सेवन भी वर्जित माना गया है। इसलिए व्रत के दौरान बिना नमक का फलाहार या व्रत के अनुरूप भोजन ही करें।

सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत की तिथियां

पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026
दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026
तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026
चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और विधिपूर्वक किए गए मंगला गौरी व्रत से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि तथा वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसलिए यदि आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं, तो सभी नियमों का पालन करें और ऐसी गलतियों से बचें जो व्रत की पूर्णता में बाधा बन सकती हैं।

नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।