महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि चेतना के जागरण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अद्भुत अवसर माना जाता है। सनातन परंपरा में यह रात्रि अत्यंत दिव्य मानी गई है, जब शिव तत्व की ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय रहती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और विधि-विधान से शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करते हैं।
शिवलिंग पर अभिषेक करना महाशिवरात्रि की पूजा का मुख्य अंग है, लेकिन कई बार लोग श्रद्धा तो रखते हैं, पर सही क्रम और विधि की जानकारी के अभाव में अनजाने में भूल कर बैठते हैं। वास्तव में शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली वस्तुओं का एक निश्चित क्रम होता है, जिसे शास्त्रों में महत्वपूर्ण माना गया है। इस क्रम को बदलना उचित नहीं समझा जाता। आइए विस्तार से जानें कि शिवलिंग पर दूध, दही और जल सहित अन्य सामग्री किस क्रम में अर्पित करनी चाहिए और सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग अभिषेक का महत्वमहाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। अभिषेक का अर्थ है—मंत्रों के साथ शिवलिंग को विभिन्न पवित्र द्रव्यों से स्नान कराना। इसमें जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर आदि का प्रयोग किया जाता है।
मान्यता है कि इस विशेष रात्रि में ब्रह्मांडीय शक्तियाँ अधिक प्रबल होती हैं। ऐसे में मंत्रोच्चार के साथ किया गया अभिषेक साधक के मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करता है। यह केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन की प्रक्रिया भी है। जब श्रद्धा और नियम के साथ अभिषेक किया जाता है, तो व्यक्ति स्वयं को शिव की दिव्य ऊर्जा से जोड़ पाता है।
पूजन से पूर्व आवश्यक तैयारीशिवलिंग पूजन प्रारंभ करने से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता आवश्यक मानी गई है।
प्रातःकाल या रात्रि में पूजा से पहले स्नान अवश्य करें।
स्वच्छ और सादे वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ-सुथरा, शांत और व्यवस्थित रखें।
पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखने का प्रयास करें।
इन तैयारियों से वातावरण सकारात्मक बनता है और पूजा अधिक प्रभावशाली होती है।
शिवलिंग पर चढ़ाने का सही क्रम
शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली वस्तुओं का क्रम इस प्रकार है:
1. सबसे पहले – शुद्ध जलपूजन की शुरुआत सदैव जल से होती है। जल पवित्रता और शीतलता का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय तांबे के पात्र का प्रयोग शुभ माना जाता है। जलाभिषेक करते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
जल से अभिषेक करने से शिव तत्व प्रसन्न होता है और वातावरण में शांति का संचार होता है।
2. दूसरा – दूधजल के बाद दूध अर्पित किया जाता है। दूध सौम्यता, करुणा और मानसिक शांति का प्रतीक है। शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाना श्रेष्ठ माना गया है। ध्यान रहे कि कच्चा दूध तांबे के पात्र में न रखें; इसके लिए स्टील या चांदी का पात्र उपयोग करें।
3. तीसरा – दहीदही समृद्धि, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसे श्रद्धा के साथ धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करें।
4. चौथा – शहदशहद जीवन में मधुरता, प्रेम और सामंजस्य का संकेत देता है। इसे अर्पित करते समय अपने जीवन में मधुर संबंधों की कामना करें।
5. पांचवां – घीघी तेज, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह आध्यात्मिक बल को बढ़ाने वाला माना गया है।
6. छठा – शक्करशक्कर सुख और समृद्धि की भावना को दर्शाती है। इसे अर्पित करते हुए परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
अंत में – पुनः जल से अभिषेकसभी द्रव्यों के अर्पण के बाद एक बार फिर से शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं। इससे सभी सामग्री का समर्पण पूर्ण होता है और पूजा विधिवत संपन्न मानी जाती है।
शिवलिंग पूजन की क्रमबद्ध विधि- पूजा आरंभ करने से पहले शांत भाव से बैठें, आंखें बंद करें और भगवान शिव का ध्यान करें। जीवन की समस्याओं के समाधान, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करें।
- इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए सबसे पहले जल अर्पित करें। परंपरा के अनुसार, शिवलिंग के दाहिने और बाएं स्थित गणेश जी और कार्तिकेय के स्थान पर जल अर्पित किया जाता है। फिर शिवलिंग के आधार भाग, जिसे मां पार्वती का प्रतीक माना जाता है, वहां जल चढ़ाएं। तत्पश्चात मध्य भाग में अर्पण करें और अंत में मुख्य शिवलिंग पर जल समर्पित करें।
- अब निर्धारित क्रम में दूध, दही, शहद, घी और शक्कर एक-एक कर मंत्रोच्चार के साथ अर्पित करें। प्रत्येक अर्पण श्रद्धा और संयम से करें।
- सभी द्रव्यों के बाद पुनः जल से अभिषेक करें।
- इसके पश्चात शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र स्वच्छ, साबुत और तीन पत्तियों वाला हो। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
- शिवलिंग पर गीले चंदन का तिलक लगाएं और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- अंत में धूप और दीप जलाकर आरती करें तथा मंगलकामना के साथ पूजा पूर्ण करें।