आज कजरी तीज का पावन पर्व है। हरियाली तीज के बाद आने वाली यह तीज विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाली और वैवाहिक सुख की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौभाग्य और स्थिरता प्राप्त होती है। यह पर्व रक्षाबंधन के तीन दिन बाद तथा कृष्ण जन्माष्टमी से लगभग पांच दिन पहले पड़ता है।
उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कजरी तीज को ‘कजली तीज’, ‘सत्तूड़ी तीज’ या ‘बड़ी तीज’ के नामों से भी जाना जाता है। इस अवसर पर विशेष रूप से रात्रि में चंद्रमा की पूजा की जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि चंद्रदेव को अर्घ्य देने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
कजरी तीज 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तप्रत्येक वर्ष की भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि को यह व्रत मनाया जाता है। इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण तृतीया 11 अगस्त की सुबह 10:33 बजे से शुरू होकर 12 अगस्त की सुबह 8:40 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार, कजरी तीज इस साल 12 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी।
वहीं, कजरी तीज के शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिसे पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह योग 12 अगस्त को सुबह 11:52 बजे प्रारंभ होगा और 13 अगस्त की सुबह 5:49 बजे समाप्त होगा। मान्यता है कि इस समय में गौरी-शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कजरी तीज 2025 पूजन सामग्रीइस दिन पूजा के लिए जरूरी वस्तुओं में शामिल हैं – श्रीफल, चंदन, गंगाजल, बेलपत्र, दूर्वा घास, शमी के पत्ते, सुपारी, कलश, भांग, मिश्री, धतूरा, अक्षत, घी, कपूर और पंचामृत। श्रृंगार के लिए हरी साड़ी, चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, कंघी, बिछुआ तथा सोलह श्रृंगार की अन्य वस्तुएं भी पूजन में रखनी आवश्यक होती हैं।
कजरी तीज पूजन की विधिसुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होने के बाद मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें। फिर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद शिवजी को बेलपत्र, दूध, दही, भांग, धतूरा और गंगाजल अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित कर पूजा करें। तत्पश्चात कजरी तीज व्रत कथा का पाठ करें। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए व्रत का पारण करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।