गुप्त नवरात्रि का आठवां दिन यानी 3 जुलाई 2025, शुक्ल अष्टमी तिथि को महाविद्याओं की आठवीं शक्ति माँ बगलामुखी की साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। उन्हें ‘स्तम्भन शक्ति’ की अधिष्ठात्री कहा जाता है—अर्थात वे जो शत्रुओं, रोगों, विवादों और मानसिक उथल-पुथल को रोककर स्थिर करती हैं। माँ बगलामुखी की साधना विशेष रूप से उन साधकों के लिए फलदायी मानी जाती है जो वाणी की शक्ति, निर्णय की दृढ़ता और बाहरी संघर्षों से रक्षा चाहते हैं।
माँ बगलामुखी का स्वरूप और रहस्यदेवी बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत विशिष्ट है। वे पीतवर्णा हैं—यानी उनके शरीर की आभा हल्दी के समान पीली होती है। वे पीले वस्त्रों और पीले पुष्पों से सुशोभित होती हैं, जो विजय, शक्ति और स्थिरता के प्रतीक हैं।
उनका सबसे प्रसिद्ध रूप वह है, जिसमें वे अपने एक हाथ से शत्रु की जीभ पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा से उसे मारने की मुद्रा में होती हैं। यह प्रतीकात्मकता दर्शाती है कि वे शत्रु की वाणी, बुद्धि और गति को रोक देती हैं, ताकि साधक निडर, स्थिर और निष्पक्ष बना रहे।
बगलामुखी की साधना: नियंत्रण और विजय की प्रक्रियाबगलामुखी की साधना को स्तम्भन शक्ति की साधना कहा गया है। स्तम्भन का अर्थ है—विकृति को रोकना, चंचलता को शांत करना, और अनावश्यक विवादों को समाप्त करना। तांत्रिक परंपरा में यह साधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है, किंतु यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह साधना विनाश नहीं, बल्कि संतुलन और रक्षा के लिए होनी चाहिए।
माँ बगलामुखी की साधना से साधक को यह बोध होता है कि किसी भी परिस्थिति में वाणी और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सच्चा साहस और विजयी होने की पहचान है।
अष्टमी तिथि और ग्रह योग3 जुलाई को अष्टमी तिथि और चंद्रमा की स्थिति साधना के लिए विशिष्ट ऊर्जा लेकर आएगी। इस दिन गुरु और बुध ग्रह की स्थिति साधना में बौद्धिक क्षमता और वाणी-नियंत्रण को सशक्त बनाएगी।
बगलामुखी की साधना खासतौर पर उस समय की जाती है जब कोई कानूनी विवाद, मानसिक क्लेश, सार्वजनिक अपमान, या शत्रुओं की सक्रियता से जूझ रहा हो। इस दिन साधक एकांत में बैठकर मौन व्रत, ध्यान और मंत्र-जप के द्वारा स्थिरता प्राप्त कर सकता है।
आधुनिक जीवन में बगलामुखी की प्रासंगिकताआज का मनुष्य जब सूचना युद्ध, सोशल मीडिया ट्रोलिंग, राजनीतिक विवाद, और आत्म-नियंत्रण के संकटों से घिरा होता है, तब माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत प्रासंगिक हो जाती है।
वे सिखाती हैं कि हर समस्या का समाधान आक्रामकता नहीं, बल्कि धैर्य, स्थिरता और वाणी की मर्यादा में है। बगलामुखी की शक्ति उस अग्नि के समान है, जो नष्ट नहीं करती, बल्कि नियंत्रण प्रदान करती है—स्वयं पर, और परिस्थितियों पर।
गुप्त नवरात्रि का आठवां दिन माँ बगलामुखी की शक्ति को समर्पित है—एक ऐसी देवी जो भीतर और बाहर दोनों तरह के संघर्षों को स्थिरता, शक्ति और विवेक से नियंत्रित करना सिखाती हैं। उनकी साधना न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाती है, बल्कि साधक को अपने अंदर की अस्थिरता, भय और ग़लतियों पर भी नियंत्रण प्रदान करती है।
यह दिन साहस के साथ-साथ विवेक और वाणी के संयम का पर्व है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं, ग्रंथों और आचार्यों के अनुभव पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल आध्यात्मिक जागरूकता और अध्ययन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।