भगवान गोवर्धन की कथा का श्रवण या पाठ करने के पश्चात् उनकी आरती का आयोजन किया जाता है। विशेष रूप से कार्तिक मास की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का महत्व अत्यधिक माना जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा के दिन स्वाति नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो पूजा करने वालों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी होगा। मान्यता है कि गोवर्धन महाराज की कृपा से घर में अन्न और धन की वृद्धि होती है तथा जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है। मथुरा में इस अवसर पर गोवर्धन की परिक्रमा करना परंपरा का अभिन्न अंग है। गोवर्धन पूजा के दिन तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही, गोवर्धन महाराज को खील, बताशे और अन्नकूट में 56 भोग अर्पित करना चाहिए। यह भोग किसी बंद कमरे में तैयार न करें, बल्कि खुले वातावरण में ही अर्पित करना श्रेष्ठ होता है। शाम के समय एक दीपक विशेष रूप से गोवर्धन महाराज पर अर्पित करना भी पूजा का अनिवार्य हिस्सा है। कथा का पाठ पूरी तरह समाप्त होने के बाद, आरती करके भगवान की कृपा प्राप्त करें और अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति सुनिश्चित करें।
आरतीश्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा,
और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
मंत्र जप करें: गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक। विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।