धनतेरस का पर्व इस साल 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दीपावली से पहले आने वाले इस त्योहार पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है। आमतौर पर लोग इस दिन सोने-चांदी के गहने, सिक्के और नए बर्तन खरीदते हैं, लेकिन धनतेरस की खरीदारी केवल महंगी धातुओं तक सीमित नहीं है। धार्मिक मान्यताओं और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार झाड़ू, धनिया के बीज, गोमती चक्र, कौड़ी और मिट्टी के दीये जैसी चीजें खरीदना भी मंगलकारी माना जाता है। इस दिन खरीदी गई वस्तुओं को सुख-समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, हर चीज खरीदना अनिवार्य नहीं है। लोग अपनी जरूरत, बजट और परिवार में चली आ रही परंपराओं के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।
धनतेरस पर कौन-कौन सी चीजें खरीदना माना जाता है शुभ?धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तनों के अलावा भी कई वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा है। इनमें शामिल हैं:
1. सोने या चांदी के आभूषणधनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना सबसे प्रचलित परंपराओं में से एक है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने या चांदी के गहने, सिक्के और अन्य वस्तुएं खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता में इन्हें धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बजट कम होने पर चांदी का छोटा सिक्का खरीदना भी एक विकल्प हो सकता है।
2. पीतल, तांबे या स्टील के बर्तनधनतेरस पर नया बर्तन खरीदने की परंपरा का संबंध भगवान धन्वंतरि से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। पीतल और तांबे के बर्तनों को विशेष महत्व दिया जाता है। इनके अलावा स्टील या कांसे के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं।
3. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तिदीपावली की पूजा के लिए धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियां या तस्वीरें खरीदने की भी परंपरा है। इन्हें घर के मंदिर में स्थापित करके दीपावली के दिन विधि-विधान से पूजा की जाती है। मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट और सामग्री का चुनाव अपनी पसंद और बजट के अनुसार किया जा सकता है।
4. झाड़ूधनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना भी कई घरों में शुभ माना जाता है। इसके पीछे घर की साफ-सफाई और दरिद्रता को दूर करने की धार्मिक मान्यता जुड़ी है। माना जाता है कि साफ-सुथरे घर में मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसी वजह से कुछ परिवार इस दिन नई झाड़ू घर लाते हैं।
5. धनिया के बीजधनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है। कुछ परिवार इसे मां लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करते हैं और बाद में इसे घर की तिजोरी में रखते हैं या मिट्टी में बो देते हैं। धार्मिक मान्यता में धनिया के बीज को उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जिन लोगों के लिए सोना-चांदी खरीदना संभव नहीं है, वे कम बजट में धनिया के बीज खरीदकर भी इस परंपरा का पालन कर सकते हैं।
6. गोमती चक्र और कौड़ीगोमती चक्र और कौड़ी को भी कई परिवार धनतेरस की पूजा में शामिल करते हैं। इन्हें शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। कुछ लोग इन्हें मां लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करने के बाद तिजोरी या पूजा स्थल पर रखते हैं। हालांकि, इनसे जुड़ी मान्यताएं क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
7. नमककुछ घरों में धनतेरस पर नमक खरीदकर लाने की परंपरा भी है। इसे घर की बरकत और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। यह एक लोक-परंपरा है, जिसका पालन सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं किया जाता।
8. मिट्टी के दीयेधनतेरस और दीपावली पर घर को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये खरीदे जाते हैं। पूजा और दीपदान में इनका विशेष उपयोग होता है। इस दिन नए दीये खरीदकर घर के मंदिर और अन्य निर्धारित स्थानों पर जलाने की तैयारी की जाती है।
9. दीपावली पूजा का प्रसादधनतेरस पर दीपावली की पूजा के लिए जरूरी सामग्री और प्रसाद भी खरीदा जा सकता है। इसमें मिठाई, बताशे और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। इन्हें दीपावली की पूजा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी के बाद क्या करें?
धनतेरस पर कोई भी नई वस्तु घर लाने के बाद उसे सीधे इस्तेमाल करने के बजाय पहले साफ कर लें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, वस्तुओं पर गंगाजल छिड़ककर उन्हें पवित्र किया जाता है। इसके बाद इन्हें घर के मंदिर में या उस स्थान पर रखें, जहां धनतेरस की पूजा की जानी है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी का ध्यान करें और खरीदी गई वस्तुओं पर कुमकुम से तिलक लगाएं। इसके बाद उन पर फूल अर्पित करें। परिवार की परंपरा के अनुसार इन वस्तुओं को दीपावली की पूजा में भी शामिल किया जा सकता है। कई घरों में धनतेरस पर खरीदी गई चीजों को दीपावली तक पूजा स्थल पर रखने की परंपरा है।
सोना-चांदी खरीदना संभव नहीं तो क्या खरीदें?
सोने और चांदी की कीमत अधिक होने के कारण हर किसी के लिए धनतेरस पर आभूषण खरीदना आसान नहीं होता। लेकिन इस पर्व की परंपराओं में छोटी और कम कीमत वाली वस्तुओं को भी जगह दी गई है। ऐसे में साबुत धनिया, मिट्टी के दीये, नई झाड़ू या अपनी जरूरत का कोई धातु का छोटा बर्तन खरीदा जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिया के बीज खरीदना भी शुभ माना जाता है। इसलिए सोना-चांदी न खरीद पाने की स्थिति में अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटी खरीदारी करके भी धनतेरस की परंपरा निभाई जा सकती है। इस दिन खरीदारी का उद्देश्य केवल महंगी चीजें घर लाना नहीं, बल्कि शुभता और समृद्धि की कामना से नई वस्तु खरीदना भी है।
धनतेरस पर कौन-सा बर्तन खरीदना सबसे शुभ माना जाता है?धनतेरस पर बर्तन खरीदना लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। इसका संबंध भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की मान्यता से जोड़ा जाता है। इस दिन पीतल और तांबे के बर्तन खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इनके अलावा स्टील और कांसे के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं। बर्तन खरीदने के बाद कुछ परिवार उसे घर लाते समय उसमें पानी, चावल या मिठाई भरते हैं। इसे समृद्धि और अन्न-धन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, बर्तन खरीदने का चुनाव अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
FAQQ1. धनतेरस 2026 कब मनाई जाएगी?धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
Q2. धनतेरस पर सोना-चांदी के अलावा क्या खरीद सकते हैं?इस दिन पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, झाड़ू, धनिया के बीज, गोमती चक्र, कौड़ी, नमक और मिट्टी के दीये खरीदने की परंपरा है।
Q3. धनतेरस पर धनिया के बीज खरीदना क्यों शुभ माना जाता है?धार्मिक मान्यता के अनुसार धनिया के बीज को उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ परिवार इन्हें लक्ष्मी पूजा में अर्पित करके तिजोरी में रखते हैं या बाद में बो देते हैं।
Q4. धनतेरस पर कौन-से धातु के बर्तन खरीदने चाहिए?धनतेरस पर पीतल और तांबे के बर्तन खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इनके अलावा स्टील और कांसे के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं।
Q5. धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुओं की पूजा कैसे करनी चाहिए?नई वस्तुओं को पहले साफ करें और उन पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद पूजा स्थल पर रखकर कुमकुम का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।