कोरोना वायरस के कारण सीबीएसई बोर्ड ने देश में 19 मार्च को कक्षा 10वीं और 12 की परीक्षाएं स्थगित कर दी थीं। देश में लगे लॉकडाउन के बाद स्कूल कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थान बंद हैं। सीबीएसई बोर्ड ने भी अपनी बची हुई परीक्षाएं 1 से 15 जुलाई को आयोजित कराने की घोषणा की है। लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने 15 जून से राज्य में 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं की अनुमति दी है। हालाकि, सरकार के इस फैसले के बाद मद्रास उच्च कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए तमिलनाडु सरकार से सवाल किया है। न्यायालय ने पूछा है कि अगर परीक्षा देने वाले 9 लाख छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए या उन छात्रों में से एक की भी मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी स्तिथि में सरकार क्या करेगी? कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या सरकार ये भरोसा दे सकती है कि यदि 10वीं कक्षा की परीक्षाओं का संचालन करने की अनुमति सरकार देती है तो क्या गारंटी है कि कोई छात्र कोरोना संक्रमण से प्रभावित नहीं होगा।
9 लाख बच्चो की जान कैसे जोखिम में डाल सकते है
कोर्ट ने कहा कि कोविद -19 की स्थिति नियंत्रण में नहीं है ऐसे में सरकार 15 जून से परीक्षा आयोजित करके 9 लाख छात्रों, 2 लाख शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में कैसे डाल सकती है? साथ ही कोर्ट ने ये भी पूछा है कि आप सैकड़ों परीक्षा केंद्रों को कैसे डिसइनफेक्ट कर रहे हैं?
15 अगस्त 2020 के बाद खुलेंगे स्कूल
बता दें कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के हफ्तों के भ्रम के बाद मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि स्कूलों और कॉलेजों को अगस्त 2020 के बाद फिर से खोला जाएगा। संभवतः 15 अगस्त 2020 के बाद शैक्षणिक संस्थान खुल जाएं। डॉ रमेश पोखरियाल ने एक इंटरव्यू में यह बात कही है। उन्होंने कहा, '15 अगस्त तक सभी परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने की कोशिश कर रहे हैं।'














