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कोरोना रिसर्च : पुरुषों में 30 फीसदी अधिक हैं महिलाओं के मुकाबले मौत का खतरा

By: Ankur Mon, 21 Dec 2020 4:08 PM

कोरोना रिसर्च : पुरुषों में 30 फीसदी अधिक हैं महिलाओं के मुकाबले मौत का खतरा

कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा हैं और लगातार इससे कई मौत हो रही हैं। ऐसे में पहले एक रिपोर्ट आई थी की महिलाओं के मुकाबले पुरुष कोरोना से ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं और अब नई रिसर्च में सामने आया हैं की मौत का खतरा भी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में 30 फीसदी अधिक हैं। यह शोध शोध क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसके मुताबिक, अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीजों के मरने का अधिक खतरा होता है, यदि वे पुरुष हैं या यदि वे मोटे हैं या मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं।

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने शोध के लिए देशभर के 613 अस्पतालों में भर्ती लगभग 67 हजार कोरोना मरीजों का आकलन किया। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान पाया कि जो मरीज मोटापे के शिकार थे, उन्हें उच्च रक्तचाप था या जो अपने डायबिटीज को नियंत्रण में नहीं रखते थे, उन्हें कोरोना के कारण मौत का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक था, जो ऐसी बीमारियों से पीड़ित नहीं थे।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना से पीड़ित बुजुर्ग मरीजों में अभी भी मौत का खतरा सबसे अधिक पाया जा रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ 20 से 39 साल के उन युवा लोगों में भी मौत का उच्च खतरा हो सकता है, जो मोटापा या उच्च रक्तचाप की चपेट में हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं देने वाले यह निर्धारित करते समय इन जोखिमों पर विचार कर सकते हैं कि कोविड-19 के मरीजों को एंटीबॉडी थेरेपी से सबसे अधिक फायदा हो सकता है, जो यदि संक्रमण के पहले कुछ दिनों में दिया जाता है, तो अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम हो सकता है।

पुरुष और महिलाओं में कोरोना वायरस के खतरे को लेकर कुछ महीने पहले जो रिपोर्ट आई थी, उसके मुताबिक भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आकर जान गंवाने वालों में 69 फीसदी पुरुष थे, यानी महिलाओं की तुलना में कहीं ज्यादा। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ। जुगल किशोर का मानना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाले 'रिस्क फैक्टर' कम होते हैं। उनका कहना था कि भारत में धूम्रपान करने वाले पुरुषों की संख्या काफी ज्यादा है जबकि महिलाओं की संख्या काफी कम। इससे फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां होती हैं और जाहिर है पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को कोरोना का खतरा अधिक होता है।

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