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कोरोना अलर्ट : क्या संजीवनी बूटी का काम करेगी रेमडेसिविर?

By: Ankur Sat, 02 May 2020 2:08 PM

कोरोना अलर्ट : क्या संजीवनी बूटी का काम करेगी रेमडेसिविर?

कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। दुनिया भर में 34 लाख से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और करीब 2।40 लाख लोगों की जान जा चुकी हैं। इन आंकड़ों को देखकर इसकी भयावहता का पता लगाया जा सकता हैं। ऐसे में जरूरी हैंकि समय रहते इसकी उचित वैक्सीन तैयार की जाए। इसके लिए लगातार शोध जारी हैं। अब इबोला के इलाज में कारगर साबित हुई रेमडेसिविर दावा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर की भूमिका अहम बताई जा रही है। क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे फेज में इस दवा के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद आने के बाद दुनिया की निगाहें अब इस दवा पर टिक गई हैं।

अमेरिका के एफडीए यानी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कोरोना महामारी के इलाज में आपातकालीन स्थिति में दवा का प्रयोग करने की अनुमति दे दी है। एफडीए प्रमुख स्टेफन हान ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए एक दवा कंपनी को आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिकृत भी कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस दवा से बहुत उम्मीद है। और केवल अमेरिका ही नहीं, इस महामारी से जूझ रहे कई देशों को एक उम्मीद की किरण दिखी है। अब सवाल यही है कि क्या रेमडेसिविर दवा कोरोना के खिलाफ 'संजीवनी' साबित होगी!

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रेमडेसिविर एक एंटी वायरल दवा है, जिसे इबोला के इलाज के लिए बनाया गया था। इसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल गिलीड साइंसेज ने बनाया है। बीते फरवरी में यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिसीज ने इस दवा का कोविड-19 के इलाज के लिए ट्रायल करने की बात कही थी। सार्स और मर्स जैसे वायरस के खिलाफ एनिमल टेस्टिंग में भी इस दवा ने बेहतर परिणाम दिए थे।

रेमडेसिविर के क्लिनिकल ट्रायल के बाद यह बात सामने आई है कि इस दवा ने कोरोना मरीजों की स्थिति में सुधार होने के समय को पांच दिन कम कर दिया है। इसका मतलब है कि कोरोना के मरीज की रिकवरी अब अपेक्षाकृत पांच दिन पहले होने लगती है। अमेरिका में कोरोना के इलाज में इस दवा का ट्रायल करनें वाली दवा कंपनी के सीईओ डेनियल ओ डे ने दवा की आपूर्ति को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर सकारात्मक सहभागिता की बात कही है।

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दवा कंपनी ने इस ट्रायल में करीब 1000 कोरोना मरीजों को शामिल किया था। इन मरीजों को दो समूह में अलग कर रेमेडेसिविर और प्लेसिबो दी गई। अध्ययन के दौरान पता चला कि रेमडेसिविर वाले मरीज, प्लेसीबो वाले मरीजों की तुलना में जल्दी से ठीक हो गए। जिन मरीजों को रेमडेसिविर दी गई, उनकी रिकवरी 31 फीसदी तेजी से हुई। इस बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिसीज के निदेशक एंथोनी फॉसी का कहना है कि 100 फीसदी सुधार की जगह 31 फीसदी तेजी से सुधार बहुत बेहतर परिणाम नहीं है, लेकिन यह अहम है। कम से कम यह तो साबित हो ही रहा कि यह दवा इस वायरस को रोक सकती है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में क्लिनिकल प्रोफेसर और अग्रणी शोधकर्ता अरुणा सुब्रह्मण्यन के मुताबिक इस दवा के तत्कालीन परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले हैं। जिन मरीजों ने रेमडेसिविर दवा का पांच दिन तक सेवन किया, उनकी हालत में 10 दिन तक दवा का सेवन करने वालों की तरह ही सुधार हुआ। प्रो। अरुणा के मुताबिक ट्रायल के परिणाम अगर सुरक्षित और प्रभावी साबित होते हैं कि यह समझने में मदद मिलेगी कि इलाज में इस दवा का किस तरह प्रयोग किया जाए।

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