राज ठाकरे की भविष्यवाणी, 4-5 महीने में देश की राजनीति में हो सकता है बड़ा बदलाव, बोले- कुछ समय के लिए PM भी नहीं होगा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने देश की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि अगले चार से पांच महीनों में देश में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हो सकता है। राज ठाकरे ने यहां तक कहा कि अगर कुछ समय के लिए देश में प्रधानमंत्री का पद खाली हो जाए, तो उन्हें इसमें हैरानी नहीं होगी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की अपनी मांग एक बार फिर दोहराई और मौजूदा चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज ठाकरे ने बेरोजगारी, महंगाई और परीक्षाओं के पेपर लीक होने जैसी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति पर भी चिंता जताई और आने वाले दिनों में अनाज की कमी होने की आशंका व्यक्त की। मनसे प्रमुख के मुताबिक, यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो सरकार के सामने स्थिति को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग फिर दोहराई

राज ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे को जरूरी बताते हुए बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2018 से ही चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराने की बात उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर वह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई राजनीतिक नेताओं से मुलाकात भी कर चुके हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि चुनाव में जीत या हार अलग बात है, लेकिन मतदाता को इस बात का भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट उसी उम्मीदवार को मिला है, जिसे उसने चुना था। उनके अनुसार, मतदान की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे लोगों को अपने मत की विश्वसनीयता को लेकर संतुष्टि रहे।

राज ठाकरे ने उन देशों का उदाहरण भी दिया, जहां चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि चुनाव के नतीजे घोषित करने में चार दिन भी लग जाते हैं, तो इसमें जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि परिणाम जल्दी घोषित करने के बजाय मतदान व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए।
बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक को लेकर जताई चिंता

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित ‘द डांस ऑफ डेमोक्रेसी’ नामक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से बातचीत में राज ठाकरे ने देश में बढ़ती समस्याओं और संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने अगले चार से पांच महीनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की आशंका जताते हुए बेरोजगारी, महंगाई और परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं का उल्लेख किया।

राज ठाकरे ने कहा, “एक समय ऐसा आएगा जब देश में कोई प्रधानमंत्री नहीं होगा।” उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि सड़कों पर उतरे बच्चों ने कुछ भी गलत नहीं किया था। उनके मुताबिक, छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि देश में लोकतंत्र कहां है। उन्होंने अमेरिका से तुलना करते हुए कहा कि असली लोकतंत्र अमेरिका में है, भारत में नहीं।

मनसे प्रमुख ने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां और खराब हो सकती हैं और अनाज की कमी पैदा हो सकती है। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता है, तो सरकार के लिए हालात को संभालना मुश्किल हो सकता है।

नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि सड़कों पर उतरे विद्यार्थी केवल परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर विरोध नहीं कर रहे थे। उन्होंने इसे व्यापक जनआक्रोश की अभिव्यक्ति बताया। उनके बयान में बेरोजगारी, महंगाई और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर लोगों की नाराजगी के साथ देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी चिंता दिखाई दी।

मीडिया और संस्थानों की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन में संस्थानों और मीडिया की स्वतंत्रता प्रभावित होने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत में लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं की पर्याप्त सुरक्षा हो रही है। इस मुद्दे पर उन्होंने अमेरिका से तुलना करते हुए देश में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

मनसे प्रमुख ने उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित सबीर भाटिया की एक डॉक्यूमेंट्री को लेकर पुलिस की कथित दखलंदाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या दर्शकों को केवल वही फिल्में देखने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त हो। इस बयान के जरिए उन्होंने मीडिया और फिल्मों के मामले में कथित हस्तक्षेप को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।

राज ठाकरे ने कहा कि किसी को भी यह नहीं मान लेना चाहिए कि सत्ता हमेशा उसी के पास बनी रहेगी। उन्होंने राजनीतिक बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए मौजूदा व्यवस्था और सत्ता के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। उनके बयान में संस्थानों की स्वतंत्रता, मीडिया की भूमिका और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद कानून-व्यवस्था पर निशाना

राज ठाकरे ने मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र की भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की कानून-व्यवस्था संभालने की क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और आरोप लगाया कि राजनीतिक दखलंदाजी पुलिस के कामकाज को प्रभावित कर रही है।

मनसे प्रमुख ने सवाल किया कि यदि भाजपा विपक्ष में होती और इसी तरह की कोई घटना हुई होती, तो क्या उसकी प्रतिक्रिया अलग होती। उनके बयान का केंद्र राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलने का मुद्दा रहा।

राज ठाकरे ने इस बात पर भी चिंता जताई कि लॉरेंस बिश्नोई के गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद होने के बावजूद उसके गैंग के सदस्य हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेने का दावा कैसे कर सकते हैं। उन्होंने गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई और कहा कि देश में कानून तो है, लेकिन व्यवस्था नहीं।

हालांकि, राज ठाकरे ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को राजनीतिक दखलंदाजी के बिना काम करने की पूरी छूट दी जाए, तो वह अपराध की दर में काफी कमी ला सकती है। इस तरह मनसे प्रमुख ने अपने बयान में देश के संभावित राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ चुनावी पारदर्शिता, लोकतांत्रिक स्वतंत्रता, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं तथा महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।